– गजल –

गजल की जान होने बाला है
जमींसे आसमान होने बाला है

कल तलक जो हाशिये पर था
बज्म की शान होने बाला है

लिख रहा जो कृष्ण पर गजलें
अब वो रसखान होने बाला है

जो कुचलता है खिलती कलियों को
वो भी अब शमशान होने बाला है

शायद उसको तरक्कियाँ खा जायें
शोहरतों का गुमान होने बाला है

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