– ग़ज़ल 

तुम्हारी याद का हरदम खजाना साथ रहता है
फकत तुम ही नहीं रहते जमाना साथ रहता है

तमन्ना वो भी रखता है हमारे पास आने की
मगर मजबूरियां कुछ है बहाना साथ रहता है

मजा आता है अक्सर रूठने में और मनाने में
किसी के रूठने में भी मनाना साथ रहता है

हुये हम बेबजह बदनाम उनसे दिल लगा करके
वो आते हैं कभी मिलने तो जाना साथ रहता है

उसी की जिन्दगी कटती अमित दुख दर्द में देखी
किसी की जिन्दगी में जब बेगाना साथ रहता है

अमित खरे
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