परिचय

नाम –            श्याम लाल शर्मा उपनाम –       अल्हड़ बीकानेरी जन्म –          17 मई 1937, ग्राम–बीकानेर, जिला–रेवाड़ी, हरियाणा । प्रथ्रम काव्य संग्रह –    भज प्यारे तू सीताराम सम्मान –                   ठिठोली पुरस्कार, काका हाथरसी सम्मान एवं हास्य रत्न । मृत्यु –            16 जून 2009...

दिल्ली तो करोड़ों ़़़

दिल्ली तो करोड़ों दिल वालों की नगरिया है कोई ले दिमाग़ से क्यों काम मेरे राम जी भूले से, यहाँ जो चला आए एक बार कोई जाने का कभी न लेगा नाम मेरे राम जी पाँव रखने को मेट्रो रेल में जगह कहाँ जाम हुईं सड़कें तमाम मेरे राम जी जाम से भला क्यों घबराएँ कार वाले, यहाँ कारों में छलकते हैं जाम मेरे राम जी                 ...

लोन से लिया है ़़़

लोन से लिया है फ़्लैट, लोन से ख़रीदी कार सूई भी ख़रीदी न नक़द मेरे राम जी लोन से पढ़ाए बच्चे, लोन से ख़रीदे कच्छे मांगी नहीं यारों से मदद मेरे राम जी क़िस्त न भरी तो गुण्डे ले गए उठा के कार घटनी थी घटना दुखद मेरे राम जी गमलों में काँटेदार कैक्टस उगाए मैंने पाऊँ अब कहाँ से शहद मेरे राम जी               ...

डाकू नहीं ठग नहीं ़़़

डाकू नहीं, ठग नहीं, चोर या उचक्का नहीं कवि हूँ मैं मुझे बख्श दीजिए दारोग़ा जी काव्य-पाठ हेतु मुझे मंच पे पहुँचना है मेरी मजबूरी पे पसीजिए दारोग़ा जी ज्यादा माल-मत्ता मेरी जेब में नहीं है अभी पाँच का पड़ा है नोट लीजिए दारोग़ा जी पौन बोतल तो मेरे पेट में उतर गई पौवा ही बचा है इसे पीजिए दारोग़ा जी               ...

तुम्हीं हो भाषण ़़़

तुम्हीं हो भाषण, तुम्हीं हो ताली दया करो हे दयालु नेता तुम्हीं हो बैंगन, तुम्हीं हो थाली दया करो हे दयालु नेता तुम्हीं पुलिस हो, तुम्हीं हो डाकू तुम्हीं हो ख़ंजर, तुम्हीं हो चाकू तुम्हीं हो गोली, तुम्हीं दुनाली दया करो हे दयालु नेता तुम्हीं हो इंजन, तुम्हीं हो गाड़ी तुम्हीं अगाड़ी, तुम्हीं पिछाड़ी तुम्हीं हो ‘बोगी’ की ‘बर्थ’ खाली दया करो हे दयालु नेता तुम्हीं हो चम्मच, तुम्हीं हो चीनी तुम्हीं ने होठों से चाय छीनी पिला दो हमको ज़हर की प्याली दया करो हे दयालु नेता तुम्हीं ललितपुर, तुम्हीं हो झाँसी तुम्हीं हो पलवल, तुम्हीं हो हाँसी तुम्हीं हो कुल्लू, तुम्हीं मनाली दया करो हे दयालु नेता तुम्हीं बाढ़ हो, तुम्हीं हो सूखा तुम्हीं हो हलधर, तुम्हीं बिजूका तुम्हीं हो ट्रैक्टर, तुम्हीं हो ट्राली दया करो हे दयालु नेता तुम्हीं दलबदलुओं के हो बप्पा तुम्हीं भजन हो तुम्हीं हो टप्पा सकल भजन-मण्डली बुला ली दया करो हे दयालु नेता पिटे तो तुम हो, उदास हम हैं तुम्हारी दाढ़ी के दास हम हैं कभी रखा ली, कभी मुंड़ा ली दया करो हे दयालु नेता           ...