परिचय

– जीवन परिचय – नाम –            डॉ० हजारी लाल गुप्त ‘हमराज‘ पिता –           स्व० श्री सूर्यबली राम माता –           स्व० श्रीमती ज्यूच्छा देवी पत्नी –            श्रीमती शारदा गुप्ता जन्मस्थान –    कप्तानगंज, आज़मगढ़ जन्म तिथि –    08–11–1946 योग्यता –        बी०ए० एम०एस० (कानपुर विश्वविद्‍यालय) एम०डी०ए० (लखनऊ विश्वविद्‍यालय) प्रकाशित पुस्तकें – अन्जान पथिक, पी कहाँ, गोधूलि, महुआ क महक, मंदाकिनी तीरे, स्नेह सुरभि, जिनि पिहका पपिहरा, जिनि कुहका कोइलिया (भोजपुरी गजल संग्रह), झरोखा, भीगी पलकें। अप्रकाशित पुस्तकें –   ममता, जलती अयोध्या, भ्रमर, मधुकर। पुरस्कार –   (1) कविवर मैथिलीशरण गुप्त सम्मान (अखिल भारतीय साहित्यकार अभिनन्दन समिति मथुरा) 14–11–2005 बाल दिवस के शुभ अवसर पर। (2) काव्य गौरव अन्तर राष्ट्रीय सम्मानोपाधि संस्थान कप्तानगंज, कुशीनगर 15–08–2008 (3) लौह पुरुष अखिल भारतीय कवि सम्मेलन एवं वार्षिकोत्सव गांगपुर, चुनार, मिर्जापुर। साहित्यिक संस्थाएं –  हरिऔध साहित्यिक परिषद अतरौलिया आजमगढ़, चेतना साहित्य परिषद लखनऊ, शैदा साहित्य मण्डल आजमगढ़, अखिल भारतीय साहित्य परिषद दिल्ली, प्रसार भारती आकाशवाणी गोरखपुर से भोजपुरी काव्यपाठ एवं दबंग चैनल पर बहुत खूब कार्यक्रम में काव्यपाठ। मोबाइल नम्बरः–   9696724498  एवं  9839864747...

इहवाँ मोरि आँखि ओनाये ़़़

– गीत – इहवाँ मोरि आँखि ओनाये न पावै मथवा पर रोरी लगाये तो हैं सिमवां पर लाल पठावत बानी लजिया देसवा के बचइबा तुहीं तोंहसे इहै आस लगावत बानी   —–(1) करगिल फतह कइ के अइबा इहवो बिधना से मनावत बानी अब देस अ देस के आन बदे जिनगी तोर दाँव चढ़ावत बानी   —–(2) सन पैंसठ से सरहद पे लला मोरे मांगी के लाली हेराइल बानी बिन्दिया छटकल मथवा के ओहीं अबले ऊ न आगि बुताइल बानी   —–(3) लजिया दुधवा के मोरे बचवा अब तो तोरे कान्हे पे आइल बानी सरिया फेरु आज दुसासन के हथवा से हे लाल खिंचाइल बानी   —–(4) मोरे राखी के लाजि सुना बिरना संघरी देसवा के जोराइल बानी मन में जवना किछु साधि रहल एही देस पे ऊहो ओनाइल बानी   —–(5) घुसपइठि भइल एतनै सुनि के सच दादी बहुत खरुआइल बानी कबले बदला ललवा के चुकी ऊ त एही बदे अकुलाइल बानी   —–(6) हमरो ई हुमासि हवै पियवा लजिया सेनुरा के लजाये न पावै गोली लगै छतिया पे भलै पिठिया पर एगो छुआए न पावै   —–(7) गंउंवां भर के बिसवास जवन पियवा तनिको ऊ ओराये न पावै होइ जइहा सहीद भले उहंवां इहवां मोरि आँखि ओनाये न पावै   —–(8) तूं त लाजि हवा देसवा के पिया सरहद के हवा तोंहईं रखवारा चमकै ला तुहीं मंगिया में मोरी धरती क हवा तूं त चान सितारा   —–(9) मोरी अइया के आँखी के जोति हवा बिनु तोरे बुझ ाला ओन्हैं अन्हिंयारा हमराज़ चेतावैं तबो तोंहके करगील हवै तोहहूँ से पियारा   —–(10)...