जीवन वृत्त

नाम –     जमालुद्दीन सफ़र जन्म –     05 जून 1953 ई० पिता –     स्व० नूर मोहम्मद (शिक्षक) माता –     बशीरन खातून अन्य उपाधि– जिलाध्यक्ष, प्रगतिशील लेखक संघ अम्बेडकर नगर। उपलब्धियाँ – (1) जायसी सम्मान– उत्कर्ष सांस्कृतिक मंच आलापुर। (2) भाषा रत्न – सरिता सेवा संस्थान जि० सुल्तानपुर। (3) बनारसी लाल सदेवरा सम्मान– हिन्दी सेवा संस्थान लखनऊ। (4) सद्भावना सम्मान – साहित्य सेवा समिति आलापुर। (5) साहित्य गुलशन सम्मान– रचनाकार कल्याण संस्थान अम्बेडकर नगर। प्रकाशित किताब – (1) मिट्टी हिन्दोस्तान की (2) यादों का सफर (3) देश दर्पण कीर्तिमान – राष्ट्रपति सम्मान 2015 पता –     ग्राम व पोस्ट– राम नगर, जिला– अम्बेडकर नगर (उ०प्र०) 224181 सम्पर्क –     8953358588...

धरती का है स्वर्ग ़़़

– गीत – धरती का है स्वर्ग जहाँ, आपस में भाई चारा भारत का दिल जिसको कहते वह है गाँव हमारा भारत का दिल जिसको —– सभी धर्म के लोग जहाँ आपस में मिल के रहते मिट्टी को ही सोना समझें खेतों में मन बहके शादी ब्याह में एक जुटता का चलता जंह भण्डारा भारत का दिल जिसको —– होली का त्योहार हो चाहे ईद मिलन का नाता दीवाली हो चाहे मुहर्रम सुख दुख में सब भ्राता संकट में एक दूजे को देते हैं जहाँ सहारा भारत का दिल जिसको —– साम्प्रदायिक सद्भाव जहाँ है प्रेम का बहता दोना प्रकृति की है छटा निराली विहंसे हर एक कोना गाय भैंस हैं जहाँ विचरते दूध की बहती धारा भारत का दिल जिसको —– अमराई में कोयल कूके खेत में नाचे मोर प्रेम की जलती दीया बाती जहाँ न होता शोर एकजेहती का रूप सफ़र है अम्न आँख का तारा भारत का दिल जिसको —–...

वृक्षारोपण करो धरा पर ़़़

– वृक्षारोपण – वृक्षारोपण करो धरा पर सुखमय यह संसार करो जीवन का आधार वृक्ष है प्रदूषण उपचार करो वृक्षारोपण करो धरा पर —– हर मानव एक वृक्ष लगाये देख के मन आह्लादित हो हरी भरी धरती हो अपनी वनों से यह आच्छादित हो वन्य जीव जनतुओं का अपने कभी नहीं संहार करो वृक्षारोपण करो धरा पर —– दस वृक्षों को अगर लगाएं पाएंगे सब पुण्य सन्तान धरा पे जितने वृक्ष लगेंगे सुख पाये उतना इन्सान प्राण दायिनी वायु वृक्ष है इस पर जरा विचार करो वृक्षारोपण करो धरा पर —– पानी की फिर कमी न होगी ऊसर भूमि लहरायेगी शस्य श्यामला बनेगी धरती प्रकृति परी मुस्कायेगी वृक्ष धरा का आभूषण है लगा के सब श्रृंगार करो वृक्षारोपण करो धरा पर —– हरे भरे वन वृक्ष न काटो वरना सब पछताओगे सूखा बाढ़ भूकम्प सुनामी लहरों से दुख पाओगे वृक्ष लगा के सफ़र धरा पर जीवन का उद्धार करो वृक्षारोपण करो धरा पर —–...

मानव मानव भेद जो करता ़़़

– कविता – मानव मानव भेद जो करता वह न पाता कभी भी कल है प्रेम अहिन्सा भाई चारा एकजेहती का रूप विमल है देश के हित में सर जो कटाते राष्ट्र प्रेम वह महा प्रबल है प्यासे मन को तृप्ति जो कर दे वह ही उसका गंगाजल है पर दुख से द्रवित जो हृदय करुणा की वह मूर्ति सकल है धैर्य व साहस जिसमें होता उसके हर संकट का हल है कर्तव्य के पथ पर सदा जो चलता वह मानव बढ़ता प्रतिपल है उसी वृक्ष की पूजा होती जो कि देता मीठा फल है घटा जो छा के भू पर बरसे समझो कि वह ही बादल है सदा समय से काम जो करता वह खुश रहता हर एक पल है उसी का जीवन बना सार्थक जिसके बांहों में निज बल है भाग्य सहारे जो भी रहता हर कामों में रहा विफल है दो दिल धड़कन एक जो कर दे सफ़र वो समझो एक गजल है...