जीवन वृत्त

नाम –         कौशल पति मिश्र साहित्यिक नाम –  वत्स जन्म –         18 सितम्बर 1959 पिता –          स्व० पं० श्रीनाथ मिश्र माता –          स्व० श्यामा देवी पत्नी –           श्रीमती आशा मिश्रा शिक्षा –         बी०ए० (लखनऊ विश्वविद्यालय, लखनऊ) जीविका –       कृषि कार्य शैली –     कठिन परिश्रम, रचना धर्मिता पता –           ग्राम–शिवतारा, मिश्र का पुरा, पोस्ट–शिवतारा जनपद– अम्बेडकर नगर, उ०प्र० मोबाइल सं०    07860279494...

हमरे गउवाँ कै ़़़

– प्रधान चरित्र – हमरे गउवाँ कै पढ़ा लिखा सज्जन इन्सान कहावै लैं अबकी चुनाव में जीति गयन एनहू परधान कहावै लैं एनहू परधान कहावै लैं —– गउवाँ में घूमै सुबह शाम झाँकै घुमि घुमि सबकै पड़ोह केकरे घर में बा काव होत लै लेबै सबकै पता टोह चुगुली कइले में मजल खूब ई गाँवां भर के जाहिर है मेहरी भतार कइसे लड़ि हैं यह कमवा में ई माहिर हैं लबडत्री दहिनी कुछ झूठ फूस एक जन के आय पढ़ावै लैं एनहू परधान कहावै लैं —– मोरि इन्द्रा मइया अमर रहैं जे पुरखन कै यादगार किहिन दुख टरै भले न जनता कै परधानन कै दुख टारि दिहिन बेचवाय के लरिकन कै गेहूँ लै लेय वजीफा लरिकन कै बैंके पर करै दलाली नित पेंशन लै ले सब विधवन कै थाने पर इनकै पहुँच बाय सबकै रिपोर्ट लिखवावै लैं एनहू परधान कहावै लैं —– केहु चाय सोपारी देय अगर तौ साथे ओकरे रहै रोज घरवा में चाहै आगि लगै मेहरी लरिका कै नहीं खोज भुईं जेतनी खाली गउवाँ में दिन रात लगाये ओहपर घात सिकरेटरी जोड़ुवां भाई हैं लेखपाल हयन सग नातबात गउवाँ में जेतना जी०एस० बा कौशल पट्टा करवावै लैं एनहू परधान कहावै लैं —–...

बइठे जब मोटर ़़़

– सारी – बइठे जब मोटर गाड़ी में तब देखे अचरज नारी का बस में घुसते ही साहब एक मार ठोकर एक नारी का वह गिरी लड़खड़ा कर बस में लगा शीशा सर में गाड़ी का खूनों की धारा बह निकली सारा आँचल भीगा साड़ी का अधमरी गिरी वह पड़ी रही अब हाल कहीं का नारी का सारी जनता है फेंक रही फौव्वारा उन पर गाड़ी का साहब सोचे अपने मन में भगवान विपति भई नारी का चोटन पर झट से लगा दिये मरहम निकाल कर सारी का सारी में भारी करामात दुख दूर हुआ बेचारी का वह बोली कोई बात नहीं इसमें है चूक सवारी का कौशल सोचै अपने मन में अब करिहैं चोट बीमारी का हमहू चलि के केहू साहब से लै आइब मरहम सारी का।...

उपजै एक कोख ़़़

– रक्षा बन्धन – उपजै एक कोख सहोदर होई एक आपन और एक थाती पराई यह सावन पूनम की तिथि को नित याद करै भगिनी अरु भाई जइसे कौशल दस शीश भये अरु द्रोपदी चीर बढ़ाये कन्हाई यह प्रीत पुनीत कै साखी है राखी भाई के लिये बहिनी कै दोहाई एक ताग बिना अनुराग लिये घर त्यागि पिया कै रहैं सब धाई भोखै चलना कोखै ललना झोखै में लिये चिनिया कै मिठाई कुछ आस लिये अभिलाष लिये मइया से चलीं नेगवा कुछ लाईं देखतै कौशल धंसि जाय धरा अबके अइसै बहिनी अरु भाई ।...