जीवन वृत्त

नामः– माधुरी सिंह मधु पिता का नामः– श्री लल्लन प्रसाद सिंह माता का नामः– श्रीमती तारा देवी जन्म स्थानः– खड्डा, जिला कुशीनगर (उ०प्र०) शिक्षाः– एम०ए० मोबाइल सं०ः– 9695779092, 8543930417...

क़ता ़़़

(1) तूफान में कश्ती को संभाला नहीं जाता मुझ तक किसी दिये का उजाला नहीं जाता जीने की भला कैसे उम्मीद छोड़ दूँ नाकामियों को मौत से टाला नहीं जाता (2) ये नन्हें पाँव हैं मेरे मुझे चलना नहीं आता बहुत मासूम भोली हूँ मुझे छलना नहीं आता न जाने लोग कैसे घर किसी का फूँक देते हैं दिया दहलीज की हूँ आग सा जलना नहीं आता (3) उम्र भर प्यार के गीत गाते रहो दर्द में भी सदा मुस्कुराते रहो मंजिलें चूम लेंगी तुम्हारे क़दम राह काँटों में अपनी बनाते रहो...

भ्रूण हत्या

(1) गर्भ में मुझको मत मारो आने दो माँ शौर्य दुनिया में मुझको दिखाने दो माँ तोड़कर डाल से मुझको फेंको न तुम मैं हूँ कोमल कली मुस्कुराने दो माँ (2) नींद से जागी हूँ मैं ख्वाब नहीं हूँ मैं खुद से रौशन हूँ माहताब नहीं हूँ हर कोई मुसफिर भला क्यों मुझे पढ़े मैं जिन्दगी हूँ कोई किताब नहीं हूँ (3) वतन की मैं दीवानी हूँ वतन को याद करती हूँ लुटे गुलशन न ये अपना यही फरियाद करती हूँ शहीदों ने जिसे सींचा है दे देकर लहू अपना चमन है ये वही प्यारा जिसे आबाद करती हूँ...

जो सहारे थे हमारे ़़़

जो सहारे थे हमारे वो बदलते जा रहे हैं रह गये हैं हम अकेले लोग चलते जा रहे हैं चुभ गया काँटा न जाने कब हमारे पाँव में रास्ते मुश्किल मगर गिरते संभलते जा रहे हैं रोज़ ही बढ़ने लगी है किस कदर दुश्वारियाँ अपने बनकर हर घड़ी कुछ लोग छलते जा रहे हैं था सिखाया उँगलियाँ थामे जिन्हें चलना कभी आशियाने आज उन हाथों से जलते जा रहे हैं मौसमी अंगड़ाइयों में धूप सूरज की लगे मोम के पुतले बने थे वो पिघलते जा रहे हैं दर्द दिल में सालता है बस यही माँ–बाप को आस्तीनों में भला क्यों साँप पलते जा रहे हैं टीस है मन में मधु दुनिया की फितरत देखकर कौरवों की चाले से बचकर निकलते जा रहे हैं...