आबला पा कोई इस़़़़़़़

——— ग़ज़ल ———- आबला पा कोई इस दश्त में आया होगा वरना आँधी में दिया किसने जलाया होगा जर्रे जर्रे पे जड़े होंगे कुंवारे सजदे एक एक बुत को खुदा उसने बनाया होगा प्यास जलते हुए काँटों की बुझाई होगी रिसते पानी को हथेली पे सजाया होगा मिल गया होगा अगर कोई सुनहरी पत्थर अपना टूटा हुआ दिल याद तो आया होगा खून के छींटे कहीं पूछ न लें राहों से किसने वीराने को गुलजार बनाया होगा...

उदासियों ने मेरी ़़़

– ग़ज़ल – उदासियों ने मेरी आत्मा को घेरा है रुपहली चाँदनी है और घुप अंधेरा है कहीं कहीं कोई तारा कहीं कहीं जुगनू जो मेरी रात थी वो आपका सवेरा है क़दम क़दम पे बगोलों को तोड़ते जायें उधर से गुज़रे गा तो रास्ता ये तेरा है ओफ़क़ के पार जो देखी है रोशनी तुमने वो रोशनी है खुदा जाने या अंधेरा है सेहर से शाम हुई शाम को ये रात मिली हर एक रंग समय का बहुत घनेरा है ख़ुदा के वास्ते ग़म को भी तुम न बहलाओ इसे तो रहने दो मेरा यही तो मेरा है —– (फिल्म अभिनेत्री स्व0 मीना कुमारी...