जीवन वृत्त

नाम– मुकेश कुमार साहित्यिक नाम– मुकेश मधुर जन्म– 19 अगस्त 1988 पिता– श्री जगत नारायण प्रजापति माता– श्रीमती देवराजी शिक्षा– बाँसुरी वादन, शास्त्रीय संगीत अभिरुचि–द साहित्य, संगीत, चित्रकला पुरस्कार एवं सम्मान– राष्ट्रीय कला मेला प्रतियोगिता में भारत की प्रथम महिला डीन चित्रकत्री डा० चित्रलेखा सिंह जी ने दो स्मृति चिन्ह, दो गोल्ड मेडल, चार प्रशस्ति पत्र देकर प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया। (दिनांक 21-02-2014) स्थाई पता– ग्राम–कटोखर, पोस्ट–हँसवर, जिला–अम्बेडकर नगर, पिनकोड–224143 मोबाइल नं०– 8853968002, 8115670276 –––...

महमहा रहा है ़़़

– बासन्ती गीत – महमहा रहा है भू गगन, लग रहा बसन्त आ गया हो रहा अधीर मन मगन, लग रहा बसन्त आ गया लग रहा बसन्त आ गया —– बादलों के अंचल में, छुप रही सुमीत चाँदनी हर तरफ दिशाओं में, गूँजने लगी है रागिनी चल रही झकोरती पवन, लग रहा बसन्त आ गया लग रहा बसन्त आ गया —– सप्तरंगी पुष्पों से, फूलों के बगान सज रहे गूँज से विहंगों के, मधुमयी बिहान सज रहे खुशबुओं से भर गया गगन, लग रहा बसन्त आ गया लग रहा बसन्त आ गया —– पीली पीली सरसों के, फूलों जैसी लेके ओढ़नी मन चुराने आई है, मुँह छुपाके कौन चोरनी दे रही है मद भरी छुअन, लग रहा बसन्त आ गया लग रहा बसन्त आ गया —– कौन है बड़ा छोटा, भेद भाव मिटने लगे झोंपड़ी की किस्मत के, अन्धकार छँटने लगे मधुर मधुर वर्ष को नमन, लग रहा बसन्त आ गया लग रहा बसन्त आ गया —–...

प्यार पलता नहीं ़़़

– ग़ज़ल – प्यार पलता नहीं आतंक के घरानों में फूल खिलता नहीं बारूद के बगानों में मिट ही जाते हैं वही लोग राहजन बनकर खुद जो रखते हैं दवा मौत की दुकानों में जिन्दगी जिन से दुखी होके जुल्म सहती है धर्म की आड़ में मिलते हैं वो ठिकानों में जो भी मुफलिस का यहाँ अम्न चैन छीनेगा जी कहाँ पाएगा अपने ही वो मकानों में हो गये वक्त से पहले वो आज ही बूढ़े जो ग़रीबी में गये कल ही कारखानों में फिर बुलाती है मधुर देख देश की सरहद है कहाँ कोइ तेरे जैसा नव जवानों में...

प्यार के नाम पर ़़़

– ग़ज़ल – प्यार के नाम पर कुछ किया कीजिये दुश्मनों से भी खुल के मिला कीजिये मन से तम को मिटा दें सदा के लिये प्यार की जोत बन कर जला कीजिये चाँद कब तक घटाओं में छुपता रहे चाँद पर आवरण मत किया कीजिये है फ़िज़ा में घुला नफ़रतों का ज़हर बनके खुशबू हवा में बहा कीजिये वो तिमिर हो कि कोई भी परिवेश हो फूल सा कंटकों में खिला कीजिये इश्क़ में सर भी कट जाये क्या ग़म मधुर राहे उल्फत में हर पल बढ़ा कीजिये...