तआरुफ़ ⁄ परिचय

– परिचय – नाम –        राशिद अनवर “राशिद” पिता –        स्व0 सिराजुल हक माता –        श्रीमती कमरुन्निसा जन्मतिथि –  17-03-1963 शिक्षा –        कामिल, विशारद प्रारम्भिक शिक्षा मदरसा अरबिया एशाअतुल ओलूम हंसवर से प्राप्त किया। इन्टरमीडिएट रांगेय राघव कालेज से, विशारद काशी से तथा अदीब कामिल उर्दू अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से किया। 1987 से 1998 तक मदरसा में शिक्षा देने का कार्य किया। शेरो शायरी का शौक बचपन से ही था। दादा असगर अली के संरक्षण में रहकर तौर तरीका, समाज सेवा, छोटे बड़ों का अदब सीखा। सैयद मजीदुद्दीन ने मलिकज़ादा से मुलाक़ात कराई। बुजुर्गों की सोहबत में हमेशा बैठते रहे। हमेशा हर आम इन्सान की भलाई के लिये चिन्तन करते रहना आदत में शुमार है। साहित्यिक रुचि दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। नये बच्चों में उर्दू-हिन्दी साहित्यिक रुचि पैदा करना तथा उन्हें प्रोत्साहन देना हमारी रुचि है। सांस्कृतिक संस्थाएं कायम करने का काम जारी है। इस समय प्रगति लेखक संघ अम्बेडकर नगर के संरक्षक के पद पर कार्य कर रहा हूँ। उर्दू एकता कमेटी भी चला रहे हैं। कई सामाजिक संस्थाओं के सदस्य भी हैं। जन मोर्चा प्रेस की पत्रकारिता में मुख्यमंत्री मा0 अखिलेष योदव द्वारा प्रशस्ति पत्र भी प्राप्त किया है। पताः- ग्राम व पोस्ट– हंसवर, तहसील- टाण्डा, जिला– अम्बेडकर नगर (उ0प्र0) मोबाइल सं0 9721166009...

जो रोजे हश्र लैला ़़़

– ग़ज़ल – जो रोज़े-हश्र लैला परदए मोहमिल से निकले गी यक़ीं है आरजूए-कैस उस दिन दिल से निकले गी तमन्ना तीग़ कातिल की रगे बिस्मिल से निकले गी तमन्नाए रगे बिस्मिल दिले कातिल से निकले गी न देखो मुस्कुरा कर ऐ तबीबो राह लो अपनी खलिश है उनके ग़म की ये ज़रा मुश्किल से निकले गी अगर महफिल निकाला अह्ले महफिल ने जो ’राशिद’ का यक़ीनन सारी रौनक़ साथ ही महफिल से निकले गी...