जीवन वृत्त

नाम – शशि भूषण पाण्डेय रिटायर्ड सूचना अधिकारी, संस्कृत विभाग, कलकत्ता। उपनाम – शशि जन्म – 31 जुलाई 1931 मृत्यु – 2009 पुस्तकें – (1) अभियान (2) ऊषा वन्दना (3) बंगाल की लोक संस्कृति (4) अन्धों का हाथी पता – ग्राम व पोस्ट– अगिथरा नारायणपुर, थाना– जहाँगीरगंज, अम्बेडकर नगर (उ०प्र०)...

पीर उर की कण्ठ में ़़़

– गीत – पीर उर की कण्ठ में आ राग कैसे बन गई है पीर उर की कण्ठ में —– यह वहीं राकेश विरहिन ताप जो बढ़ कर बढ़ाता सिन्धु क्यों इसके चरण पर झूम श्रद्धान्जलि चढ़ाता आह इसकी शीतता अनुराग कैसे बन गई है पीर उर की कण्ठ में —– प्रिय वियोग विदग्ध रंगिनि आत्म विस्मृति ढो रही है पीर को उर में समेटे आज सन्ध्या सो रही है वेदना इसकी अखण्ड सुहाग कैसे बन गई है पीर उर की कण्ठ में —– वही जो मानव हृदय में चिर पिपासा बीज बोए तृप्ति की आशा लिये तड़पन अपरिमित जो संजोये रागिनी करुणा प्रपूरित फाग कैसे बन गई है पीर उर की कण्ठ में —– ठोकरें खा कर जगत की प्यार जिसका पल न पाया जो कि झंझा में गिरा पर दीनहीन संभल न पाया वह पलायन वृत्ति बोल विराग कैसे बन गई है पीर उर की कण्ठ में —–                         ...

देवि वर दे ़़़

– गीत – देवि वर दे बढ़ सकूँ मैं श्रीचरण में स्थान पाऊँ देवि वर दे —– देखता हूँ अमल अनुपम भाव का गुम्फन सुहाना पा सुरभिमय सुमन डाली समुदमातः मुस्कुराना आ गया हूँ द्वार तक पर शिथिल हूँ क्या लौट जाऊँ देवि वर दे —– लख प्रवाहित धार रस की शुष्क मानस तिलमिलाता अर्चना के सुमन धूमिल पग स्वयं ही ठमक जाता रुक विवशते उग्र मत हो भगवती से पूछ आऊँ देवि वर दे —– देवि बेमांगी दया से किसी को कवि गुरु बनाया सुन विरुद् तेरा पुजारी दूर से कुछ फूल लाया जा करे स्वीकार तो मैं भी सफल जीवन बनाऊँ देवि वर दे —–...