– ग़ज़ल –
ऐशो-इशरत में खो गये हम लोग
क्या थे क्या आज हो गये हम लोग
मिट रहे हैं नक़ूश माज़ी के
इस ज़माने से लो गये हम लोग
उम्र भर जागते रहे लेकिन
वक़्त आया तो सो गये हम लोग
क्या उगे फस्ल एकता की यहाँ
बीज नफ़रत के बो गये हम लोग
बे सबब बादबाँ का क्या शिकवा
ख़ुद ही कश्ती डुबो गये हम लोग
वो भी क्या हौसला था ऐ राशिद
सख़्त दिल में समो गये हम लोग
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