by Nazar | Aug 24, 2015 | Amit Khare
– जीवन परिचय – नाम- अमित कुमार खरे आत्मज- श्री अशोक कुमार खरे जन्म तिथि- 11–07–1981 न्म स्थान- सेवढ़ा जिला दतिया (म‐प्र‐) कृतिया- गजल‐ मुक्तक‐ दोहा‐ योग्यता – बी०एस०सी० (गणित), डी०एड० रूचिया- साहित्य के प्रति झुकाव, कवि सम्मेलनो मे जाना, सुनना सुनाना, पर्यटन लेखन अभिरूचियां- गीत गजल घनाक्ष्री मे विषेष रूचि कवि सम्मेलन का संचालन संयोजन आदि। संप्रति- शा‐प्रा‐वि‐ डूडा ब्लाक लहार जिला भिण्ड मे शिक्षक के रुप मे कार्यरत। युवा साहित्यकार मंच सेवढ़ा के कोषाध्यक्ष के रुप मे साहित्य सेवा। सम्मान- मां चामुण्डा देवी जन कल्याण समिति द्वारा जगदीश शरण विलगैंया (मधुप) सम्मान–2014 पता – अमित कुमार खरे मुहल्ला- बजारिया, सेवढ़ा, जिला- दतिया (म‐प्र‐) पिन- 475682 मोबाइल- 9575441160...
by Nazar | Aug 14, 2015 | Amit Khare
– गजल – मुश्किलों में सम्हलना होगा गमों से भी निकलना होगा शौहरतें इतनी आसान कहां खारों के रास्ते चलना होगा मछलियां मर रहीं हैं देखिये अब तो पानी बदलना होगा मुहब्बत की है तो याद रखो ताउम्र तुम्हैं अब जलना होगा शायरी में भी सुनो अमित टूटना होगा बिखरना होगा...
by Nazar | Aug 14, 2015 | Amit Khare
– गजल – सारी शर्तें हुईं कुबूल दरक रहे हैं मगर उसूल वो गुलशन में रहे मगर ऐसे जैसे कोई बबूल सूद कीं बातें हैं बेमानी अब खतरे में दिखता मूल जो तुमने अहसान किये हैं हम जाएंगे कैसे भूल खोला उसने ऐसा मोर्चा रखी हिलाकर सबकी चूल...
by Nazar | Aug 14, 2015 | Amit Khare
– गजल – तुम्हारी बज्म से कुछ बावकार हैं हम भी कुछ बुलन्दी के हिस्सेदार हैं हम भी न ऐब सारे कभी दूसरों में तुम देखो इस जमाने में गुनहगार हैं हम भी शहर की महफिलों में रोशनी है हमसे ही और अंघेरों के जिम्मेदार हैं हम भी कोशिशें खूब कीं उसने हमें डुबोने की अपने दम से मगर दरिया के पार हैं हम भी छोडकर तुझको अब जाऐं तो कहां जाऐं हम तेरी जुल्फों में गिरफतार हैं हम भी...
by Nazar | Aug 14, 2015 | Amit Khare
– गजल – गजल की जान होने बाला है जमींसे आसमान होने बाला है कल तलक जो हाशिये पर था बज्म की शान होने बाला है लिख रहा जो कृष्ण पर गजलें अब वो रसखान होने बाला है जो कुचलता है खिलती कलियों को वो भी अब शमशान होने बाला है शायद उसको तरक्कियाँ खा जायें शोहरतों का गुमान होने बाला है...
by Nazar | Aug 14, 2015 | Amit Khare
– ग़ज़ल – तुम्हारी याद का हरदम खजाना साथ रहता है फकत तुम ही नहीं रहते जमाना साथ रहता है तमन्ना वो भी रखता है हमारे पास आने की मगर मजबूरियां कुछ है बहाना साथ रहता है मजा आता है अक्सर रूठने में और मनाने में किसी के रूठने में भी मनाना साथ रहता है हुये हम बेबजह बदनाम उनसे दिल लगा करके वो आते हैं कभी मिलने तो जाना साथ रहता है उसी की जिन्दगी कटती अमित दुख दर्द में देखी किसी की जिन्दगी में जब बेगाना साथ रहता है अमित खरे...