by Nazar | Oct 2, 2016 | Abhishek Kumar Ambar
जीवन है एक डगर सुहानी सुख दुःख इसके साथी हैं, कर संघर्ष हमें जीवन में मंजिल अपनी पानी हैं । बड़ी दूर है मंज़िल अपनी लंबा बड़ा है इसका रास्ता, चलता रह बस तू चलता रह पाकर मंजिल लेना सस्ता। चल दिखला दे सबको तू बाकी तुझमें जो जवानी है, कर संघर्ष हमें जीवन में मंजिल अपनी पानी है। मानो मेरी बात सखे तुम जीवन को न व्यर्थ गँवाना, याद रखे तुझको ये दुनिया कर्म कुछ ऐसे करके जाना। इतिहास के पन्नों पर लिखनी एक नयी कहानी है। कर संघर्ष हमें जीवन में मंजिल अपनी पानी है। चलते रहना सदा ओ राही मंजिल तुझको मिल जायेगी, बस तू थोडा धैर्य रखना मेहनत तेरी रंग लाएगी। करके रहना उसको पूरा मन में जो तूने ठानी है। कर संघर्ष हमें जीवन में मंजिल अपनी पानी...
by Nazar | Oct 2, 2016 | Abhishek Kumar Ambar
साथ जबसे तुम्हारा मिला सारी दुनिया बदल सी गई। प्रेम का पुष्प जब से खिला सारी दुनिया बदल सी गई। बदला बदला सा मौसम यहां बदली बदली फिजायें यहां। पेड़ पौधे सभी झूम कर प्रेम के गीत गायें यहां। मन में जबसे ये तूफां उठा सारी दुनिया बदल सी गई, प्रेम का पुष्प जबसे खिला सारी दुनिया बदल सी गई। गुल खिले मन में गुलशन खिले आप जबसे हमें हो मिले। आप से महका आँगन मेरा भूल बैठे सभी हम गीले। सर पे छाया अजब सा नशा सारी दुनिया बदल सी गई, प्रेम का पुष्प जबसे खिला सारी दुनिया बदल सी गई। चाँद तारों में देखूं तुझे सब नज़ारों में देखूं तुझे। आइना सामने राखकर अपनी आँखों में देखूं तुझे। जबसे दिल ये दीवाना हुआ सारी दुनिया बदल सी गई, प्रेम का पुष्प जबसे खिला सारी दुनिया बदल सी...
by Nazar | Oct 2, 2016 | Abhishek Kumar Ambar
और न कुछ भी चाहूँ तुझसे बस इतना ही चाहूँ। अपने हर एक जन्म में सिर्फ तुझको ही माँ में पाऊं। और न कुछ भी चाहूँ। लाड़ प्यार से मुझको पाला पिला पिला ममता का प्याला। गिरा जब जब में तूने संभाला तुझसे है जीवन में उजाला। माँ तेरे बलिदान को में शत् शत् शीश नवाऊँ। और न कुछ भी चाहूँ। हर पल मेरी चिंता रहती मेरे लिए दुःख दर्द है सहती। रहे सदा खुश मेरा बेटा सिर्फ यही एक बात है कहती। क़र्ज़ बहुत है तेरा मुझपर कैसे इसे चुकाऊं। और न कुछ भी चाहूँ। माँ मेरी ममता की मूरत ईश्वर की लगती है सूरत। एक अगर जो साथ माँ दे तो नही किसी की मुझे जरुरत। तेरे खातिर मेरी माँ में तो कुछ भी कर जाऊँ। और न कुछ भी चाहूँ, अपने हर एक जन्म में सिर्फ तुझको ही माँ में...
by Nazar | Oct 2, 2016 | Abhishek Kumar Ambar
हे विरणावादिनी मईया मेरी झोली ज्ञान से भर दे। सत्य सदा लिखे कलम मेरी मुझको ऐसा वर दे। छल दंभ पाखंड झूठ से हमको दूर करो तुम। मन में भर दो अविरल ज्योति तम को दूर करो तुम। हे शारदे मुझ पे बस तू ये उपकार कर दे। मेरी झोली ज्ञान से भर दे। न भेद जाति धर्म का हो न ऊँचा कोई नीचा। सब ही तेरे बच्चे हम हैं कर्म हमारी पूजा। मजधार में फंसी है नैया भव से पार कर दे। मेरी झोली ज्ञान से भर...
by Nazar | Oct 2, 2016 | Abhishek Kumar Ambar
हे माता मेरी शारदे तू भव से उतार दे। बुद्धि को विस्तार दे ज्ञान का भंडार दे। हे माता मेरी शारदे। दूर सब अँधेरे हो ज्ञान के सवेरे हो। सुबुद्धि दे ज्ञान दे सपनों को उड़ान दे। हे माता मेरी शारदे। मिटे जुलम की दास्ताँ न कोई पाप हो यहाँ। हर तरफ प्यार हो न कोई तकरार हो। हे माता मेरी...
by Nazar | Oct 2, 2016 | Abhishek Kumar Ambar
हम होंगे सब में पास हम होंगे सबमें पास हम होंगे सब में पास एक दिन………..। हो………………। सोते हैं बिंदास लिखते हैं बक़वास फिर भी है विश्वास मार्क्स मिलेंगे झक्कास एक दिन……….। हो……………..। सबके अलग अलग एजेंडे आज़माते नए नए हथकंडे जब पेपर में आते अंडे चलते टीचर जी के डंडे फिर भी रखते पूरे आस हम होंगे सबमे पास एक दिन………….। व्हाट्सएप पर होता है सवेरा फेसबुक पर रहता है डेरा पुस्तक न आती हमें रास करते खुदा से है अरदास न हमें इस झंझट में फाँस हम होंगे सबमे पास एक...