by Nazar | Nov 7, 2016 | Dushyant Kumar
ये जो शहतीर है पलकों पे उठालो यारो अब कोई ऐसा तरीक़ा भी निकालो यारो दर्दे दिल वक्त को पैग़ाम भी पहुँचाए गा इस कबूतर को ज़रा प्यार से पालो यारो लोग हाथों में लिये बैठे हैं अपने पिंजरे आज सइयाद को महफिल में बुलालो यारो आज सीवन को उधेड़ो तो ज़रा देखेगे आज सन्दूक़ से वो खत तो निकालो यारो रहनुमाओं की अदाओं पे फिदा है दुनिया इस बहकती हुई दुनिया को संभालो यारो कैसे आकाश में सूराख नहीं हो सकता एक पत्थ्रर तो तबीयत से उछालो यारो लोग कहते थे कि ये बात नहीं कहने की तुमने कह दी है तो कहने की सज़ा लो यारो –– दुष्यन्त...