by Nazar | Oct 2, 2015 | Arya Harish Koshalpuri
नाम – आर्य हरीश कोशलपुरी जन्म तिथि – 14–12–1970 जन्म स्थान – मु०शाहपुर औराँव,पोस्ट–रामनगर,जिला–अम्बेडकर नगर(उ०प्र०)भारत। प्रकाशित पुस्तक – (1) गीत हमारे वैदिक तट पर (गीत संग्रह) (2) प्यासा दरिया (ग़ज़ल संग्रह) (3) सपने उधार के (गीत संग्रह) (4) कबिरा खड़ा बजार में (पत्रिका संपादन) पुरस्कार एवं सम्मान – (1) रंगाश्रम गोरखपुर (2) दलित साहित्य अकादमी, गोरखपुर (3) अखिल भारतीय कवि सम्मेलन समिति, गांगपुर चुनार, मिर्जापुर (उ०प्र०) (4) विश्व भोजपुरी सम्मेलन, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी रचना संकलन का उद्देश्य– साहित्य में योगदान आर्य हरीश कोशलपुरी का जन्म एक प्रतिभा सम्पन्न आर्य परिवार में हुआ। आपने गोरखपुर विश्वविद्यालय से परास्नातक एवं लघु शोध, प्रयाग संगीत समिति इलाहाबाद से संगीत प्रभाकर एवं बाम्बे आर्ट से कला प्रशिक्ष्ण प्राप्त किया। हिन्दी साहित्य में युयुत्सावाद के जनक शलभ श्री रामसिंह एवं जन कवि अदम गोण्डवी आपके साहित्यिक आचार्य हैं। तत्क्षण प्रगतिशील लेखक संघ, अम्बेडकर नगर के जिला सचिव हैं। आपका जीवन सर्वहारा वर्ग के उत्थान हेतु एक आहुति है।...
by Nazar | Aug 9, 2015 | Arya Harish Koshalpuri
– ग़ज़ल – किसी जानिब क़लम उट्ठे कोई मौजू नहीं देते लहरते बेहया के फूल हैं खुशबू नहीं देते तिजोरी भर के रखते हैं सदा अपनों की खातिर ये ग़रीबी दूर हो जिससे वही साहू नहीं देते हमारी बात पर विश्वास ना हो आजमा लेना यहाँ शैतान सब देता है जो साधू नहीं देते अलग है प्यार करने का तरीका आज भी अपना खुशी देते हैं हम जिसको उसे आँसू नहीं देते हम ऐसे ज्योतिषी हैं काट देते ग्रह दशाओं को किसी की ज़िन्दगी में राहु वो केतू नहीं देते...
by Nazar | Aug 9, 2015 | Arya Harish Koshalpuri
– ग़ज़ल – अगर चाहते हो तबाही से बचना तो सरकार की सुर्ख स्याही से बचना कहीं डाकुओं से अगर बच गये भी है मुश्किल बहुत एक सिपाही से बचना यहाँ न्याय बहरा है कानून अन्धा हरिश्चन्द की हर गवाही से बचना मुहब्बत की राहों में धोखे बहुत हैं सदा एक अन्जान राही से बचना चढ़ा कर तुम्हें खींच लेंगे किसी दिन ये वो दोस्त हैं वाह–वाही से बचना...
by Nazar | Aug 9, 2015 | Arya Harish Koshalpuri
– ग़ज़ल – उठता शोर संभालो यारों घर का चोर संभालो यारों लूट न लें रजनी से पहले सुरभित भोर संभालो यारों बे मौसम जो नाच रहा है नकली मोर संभालो यारों प्यास कुएँ से बुझ जायेगी उलझी डोर संभालो यारों इस सीमा से उस सीमा तक कोई छोर संभालो यारों...
by Nazar | Aug 9, 2015 | Arya Harish Koshalpuri
– ग़ज़ल – जश्ने आज़ादी मनाई जा रही है अम्न की बंसी बजाई जा रही है भाषणों में हैं भगतसिंह आज भी फस्ल जयचन्दी उगाई जा रही है हर तरफ इन्साफ के मुन्सिफ हैं पर बे ख़ता फाँसी सुनाई जा रही है जल समस्या पर बहस हाथों में रम काग़ज़ी गंगा बहाई जा रही है एक टूटी ही नहीं कि दूसरी पाँव की बेड़ी बनाई जा रही है...
by Nazar | Aug 9, 2015 | Arya Harish Koshalpuri
– ग़ज़ल – दुश्मन को मेहमान बनाया पत्थर को भगवान बनाया मेरे दिल का हाल न पूछो सारिक को सुल्तान बनाया खुद को रोटी की चाहत में साधू से शैतान बनाया दौरे सियासत का क्या कहना कुफ्र को ही फरमान बनाया इस दुश्वारी के आलम में क्यों मुझको इन्सान बनाया...