by Nazar | Apr 30, 2017 | Meena Kumari Naaz
——— ग़ज़ल ———- आबला पा कोई इस दश्त में आया होगा वरना आँधी में दिया किसने जलाया होगा जर्रे जर्रे पे जड़े होंगे कुंवारे सजदे एक एक बुत को खुदा उसने बनाया होगा प्यास जलते हुए काँटों की बुझाई होगी रिसते पानी को हथेली पे सजाया होगा मिल गया होगा अगर कोई सुनहरी पत्थर अपना टूटा हुआ दिल याद तो आया होगा खून के छींटे कहीं पूछ न लें राहों से किसने वीराने को गुलजार बनाया होगा...
by Nazar | Nov 7, 2016 | Dushyant Kumar
ये जो शहतीर है पलकों पे उठालो यारो अब कोई ऐसा तरीक़ा भी निकालो यारो दर्दे दिल वक्त को पैग़ाम भी पहुँचाए गा इस कबूतर को ज़रा प्यार से पालो यारो लोग हाथों में लिये बैठे हैं अपने पिंजरे आज सइयाद को महफिल में बुलालो यारो आज सीवन को उधेड़ो तो ज़रा देखेगे आज सन्दूक़ से वो खत तो निकालो यारो रहनुमाओं की अदाओं पे फिदा है दुनिया इस बहकती हुई दुनिया को संभालो यारो कैसे आकाश में सूराख नहीं हो सकता एक पत्थ्रर तो तबीयत से उछालो यारो लोग कहते थे कि ये बात नहीं कहने की तुमने कह दी है तो कहने की सज़ा लो यारो –– दुष्यन्त...
by Nazar | Oct 18, 2015 | Johar Maghari
– ग़ज़ल – तेरी हर अदा सितमगर तेरी हर निगाह ज़ालिम तेरी शोखि़यों से कितने हुए घर तबाह ज़ालिम अगर अह्ले ग़म पे अब भी न हुई निगाह ज़ालिम किसी और से बढ़ा लें न वो रस्मो-राह ज़ालिम तेरी ख़ातिरन अदू से भी किया निबाह ज़ालिम न मिले गा कोई मुझसा तेरा ख़ैर ख़्वाह ज़ालिम मुझे ये न थी तवक्को कभी तुझसे आह ज़ालिम कि तू इस तरह करेगा मेरा दिल तबाह ज़ालिम तेरी बेरुख़ी के सदक़े मुझे भी तो कुछ ख़बर हो मेरी क्या ख़ता है मुझसे हुआ क्या गुनाह ज़ालिम मेरी हर वफ़ा के बदले हुए मुझपे ज़ुल्म क्या-क्या मेरे दिल में है अभी तक वही तेरी चाह ज़ालिम मेरी ज़ात से जब इतनी तुझे बदगुमानियां हैं कोई कैसे फिर मिटाए तेरा इश्तबाह ज़ालिम मेरी बस यही दुआ है कहीं तू भी दिल लगाए तुझे हो किसी से उल्फ़त करे तू भी आह ज़ालिम कभी ऐसा दिन भी आए तुझे हो अज़ी़ज जौहर कि है ज़ौ से जिसकी रौशन तेरी बारगाह ज़ालिम (1948, शायर– जौहर मगहरी)...
by Nazar | Oct 18, 2015 | Meena Kumari Naaz
– ग़ज़ल – उदासियों ने मेरी आत्मा को घेरा है रुपहली चाँदनी है और घुप अंधेरा है कहीं कहीं कोई तारा कहीं कहीं जुगनू जो मेरी रात थी वो आपका सवेरा है क़दम क़दम पे बगोलों को तोड़ते जायें उधर से गुज़रे गा तो रास्ता ये तेरा है ओफ़क़ के पार जो देखी है रोशनी तुमने वो रोशनी है खुदा जाने या अंधेरा है सेहर से शाम हुई शाम को ये रात मिली हर एक रंग समय का बहुत घनेरा है ख़ुदा के वास्ते ग़म को भी तुम न बहलाओ इसे तो रहने दो मेरा यही तो मेरा है —– (फिल्म अभिनेत्री स्व0 मीना कुमारी...
by Nazar | Oct 18, 2015 | FAMOUS
– ग़ज़ल – घबरा गये हैं वक्त की तनहाइयों से हम उकता चुके हैं अपनी ही परछाइयों से हम साया मेरे वजूद की हद से गुज़र गया अब अजनबी हैं आप शनासाइयों से हम ये सोच कर ही खुद से मोख़ातिब रहे सदा क्या गुफ़्तगू करेंगे तमाशाइयों से हम अब देंगे क्या किसी को ये झोंके बहार के मांगें गे दिल के ज़ख़्म भी पुरवाइयों से हम जर्रीन क्या बहारों को मुड़ मुड़ के देखिये मानूस थे ख़ेज़ाँ की दिल आसाइयों से हम —– (शायरा- अफ़त...