by Nazar | Aug 23, 2015 | Pankaj Vatsyayan
– जीवन परिचय – नाम- पंकज कुमार मिश्र साहित्यिक नाम- पंकज वात्स्यायन पिता- श्री मातबर मिश्र माता- श्रीमती शारदा मिश्रा शैक्षिक विवरण- बी एस सी, बी एड, एम ए (शिक्षा शास्त्र, अर्थ शास्त्र), नेट कार्य- प्रबन्धक, पूर्वान्चल इन्टर कालेज, आज़मगढ़ (उ०प्र०) प्रवक्ता- बी०एड० पूर्वान्चल पी०जी० कालेज, आज़मगढ़ पता- पटेल नगर, रानी की सराय, आजमगढ़। पुस्तकें- (1). पर्यावरण एवं राष्ट्र गौरव (2) अधिगमशास्त्र (3). ग़ज़ल संग्रह (प्रेस में)...
by Nazar | Aug 15, 2015 | Pankaj Vatsyayan
नाग यज्ञ होगा दोबारा व्याल रूप इंसान आज साक्षात् देखकर आया हूँ। गिरगिट कैसे रंग बदलता आज देखकर आया हूँ।। बदल रहे मौसम की मैनें आज हकीकत देखी है। संबंधों के उपवन को बर्बाद देखकर आया हूँ।। पाल रखे थे आस्तीन में दिल पर सीधा वार हुआ। विष से मन का हाल बुरा है डंक झेलकर आया हूँ।। कह दो पंकज दुनिया से अब ये गल्ती फिर ना होगी। मानवता का पृष्ठ फाड़कर आज फेंककर आया हूँ।। अब मिलना तो बचकर मिलना जन्मेजय फिर से जिन्दा है। नाग यज्ञ होगा दोबारा खुद से बोलकर आया हूँ।। ...
by Nazar | Aug 15, 2015 | Pankaj Vatsyayan
मैं अकेला नहीं हूँ व्याकुल, व्यवस्था, के विकृत स्वरूप से। विह्वल व्यथित, मैं अकेला नहीं हूँ।। और भी मन हैं, विद्रोह की तैयारी में। क्रोधित आक्रोशित, मैं अकेला नहीं हूँ।। गर परिवर्तन का वादा, पूरा नहीं हुआ महोदय। तो उखाड़ फेंके जाओगे, क्योंकि; मैं अकेला नहीं हूँ।। ये बच्चे वच्चे की चिंता, आप जनता पर छोड़ो। अच्छे दिन के लिए प्रयास करो। वर्ना दफनानें की तैयारी में; मैं अकेला नहीं हूँ।। जिसनें भी जनता के सपनों, से खिलवाड़ किया है। निश्चित ही उनको, मिटा दिया गया है। इसके गवाह बहुत से हैं; मैं अकेला नहीं हूँ।। ...
by Nazar | Aug 15, 2015 | Pankaj Vatsyayan
पेट की आग रोकिये साहिब शीत का असर देखिये साहिब इलाज़ मौत का कीजिये साहिब मकान नंबर से कहाँ पता चलेगा वो बेघर है पूछिये साहिब दर्द से वो बहुत बेहाल है दवा कोई न दीजिये साहिब सच तो है के बहुत ये भूखा है इसको रोटी तो दीजिये साहिब कब कहा इसनें भीख दो इसको सिर्फ दंगा तो रोकिये साहिब बंद जबसे शहर है कर्फ्यू से बंद इनकम है सोचिये साहिब कहाँ ज़िंदा रहा है बाप कोई रोते बच्चों को देखके साहिब इससे पहले कि मर जाये वो पेट की आग रोकिये साहिब ...
by Nazar | Aug 15, 2015 | Pankaj Vatsyayan
– अल नीनो से तड़प रहा है – कहने को तो अपने दिल का हाल सुनाकर आया हूँ। अपने मन की पीड़ा का बादल बरसाकर आया हूँ। फिर भी व्याकुल व्यथित बहुत हूँ कैसी पीर नई है भाई। उसकी आँखों के दरिया को दिल में छिपाकर आया हूँ।। कैसे ना ये रूह भीगती उसके बेबस आँसूं से। उसके भूखे बच्चों को मैं आज देखकर आया हूँ।। सच कहता हूँ दर्द का सागर अल नीनो से तड़प रहा। इक तूफान ह्रदय में अपने आज जगाकर आया हूँ।। इसे मात्र धमकी मत समझें कह दो सत्ता धारी से। मैं विचार का दीप अखंडित आज जलाकर आया हूँ।। बच कर रहना तेज़ सुनामी उट्ठेगी इस बार कलम से। इस सत्ता की जड़ें खोखली स्वयं देखकर आया हूँ।।...