by Nazar | Oct 27, 2016 | Nirankar Shukla Sakar
———— ग़ज़ल ———— जिन्दगी को एक अदद आधार मिल जाता अगर मेरी कुर्बानी पे ये उपहार मिल जाता अगर शान से जी लेता मैं भी चार दिन की ज़िन्दगी प्यार के बदले में मुझको प्यार मिल जाता अगर बेच लेता मैं भी अपनी ज़िन्दगी की डायरी शायरी का मुझको कारोबार मिल जाता अगर आप सबकी भाँति मैं भी घर बसा लेता कहीं सिर्फ दो बाहों का कारागार मिल जाता अगर शायरी का ये हुनर पहले ही आ जाता मुझे आप ही की भाँति एक किरदार मिल जाता अगर ठीक से सो लेता मैं भी उम्र भर में एक दिन उम्र भर में एक भी रविवार मिल जाता अगर यूँ शुरु से अन्त तक ये डायरी रोती नहीं वक्त पर ‘साकार‘ को उपचार मिल जाता अगर...
by Nazar | Oct 27, 2016 | Nirankar Shukla Sakar
————- ग़ज़ल ————— लहू मेरा पसीने में बदल कर सूख जाता है तभी जाकर कहीं परिवार थोड़ा मुस्कुराता है और उस पर भी ये इल्जाम कि मैंने किया क्या है मेरे दिल के इलाके में बहुत हलचल मचाता है न जाने कितनी मुश्किल से दर्द गज़लों में ढलता है मेरे गीतों को तब कोई रह–रह गुनगुनाता है ये अनदेखी बुढ़ापे में ग़ज़ब का दर्द देती है जख्म ऐसा कि जिसको कोई–कोई देख पाता है बिना पूछे क्यों पैदा किया बच्चे पूछते हैं ये गलती वो न दोहराए मेरा जीवन सिखाता है तुम आंसू को गजल कह कर मुझे मायूस मत करना दिल–ए–साकार रोता है लोग कहते हैं गाता है...
by Nazar | Oct 23, 2016 | Nirankar Shukla Sakar
———— ग़ज़ल ———– चार दिन की चाँदनी है फिर अंधेरी रात है वो भी अपना हक नहीं है आपकी सौग़ात है कोई न कोई मेरा हर दिन दुखा जाता है दिल मेरे घर आके बता जाता मेरी औकात है अच्छे दिन की मुझको भी उम्मीद थी पर क्या कहूँ मुश्किलों की रात दिन बढ़ती रही तादात है मेरी ग़ज़लों को सुने बिन आप जा सकते नहीं अपनी गा के चल दिये हो ये भी कोई बात है दूल्हे बिन बारात मेरी जिन्दगी का है सफर दाल थाली में नहीं है सिर्फ चटनी भात है सूचियों में छप नहीं पाता कभी ‘साकार‘ है जाने कैसा नाम मेरा जाने कैसी जात है...
by Nazar | Oct 23, 2016 | Nirankar Shukla Sakar
निरंकार शुक्ल ‘साकार‘ जन्म तिथि– 15-06-1973 पिता– स्व० रामरक्षे शुक्ल माता– श्रीमती आनन्दकली देवी जन्म स्थान– ग्राम–पिपरी रोहुआ, तहसील–रावतगंज, जिला–गोन्डा (उ०प्र०) वर्तमान पता– अमवां, फर्टिलाइजर, गोरखपुर (उ०प्र०) शिक्षा– विज्ञान स्नातक (बी०एस०सी०) मोबाइल सं० 9005400902 –––...