by Nazar | Apr 3, 2018 | Vivek Tripathi
ये भ्रमर गुलसिता में रहे ना रहे शोख खुश्बू हवा में रहे ना रहे हर घड़ी को समझ बस यहां आखिरी कल तु जिन्दा जहां मे रहे ना रहे जिन्दगी के मजे लूट ले बेसबब चांदनी फिर निशा में रहे ना रहे आज ही मांग ले जो तमन्ना है वो कल को बरकत दुआ में रहे ना रहे नेह कर ले जमाने से बनके सुघर क्या पता मन फेजा में रहे ना रहे दिल की बातों का इजहार कर ले सनम कल ये साहस जुबॉ में रहे ना रहे...
by Nazar | May 7, 2017 | Vivek Tripathi
——– ग़ज़ल ———— ये भ्रमर गुलसिता में रहे ना रहे शोख खुश्बू हवा में रहे ना रहे हर घड़ी को समझ बस यहां आखिरी कल तु ज़िन्दा जहां मे रहे ना रहे ज़िन्दगी के मजे़ लूट ले बेसबब चांदनी फिर निशा में रहे ना रहे आज ही मांग ले जो तमन्ना है वो कल को बरक़त दुआ में रहे ना रहे नेह कर ले जमाने से बनके सुघर क्या पता मन फ़ेजा में रहे ना रहे दिल की बातों का इज़हार कर ले सनम कल ये साहस ज़ुबॉ में रहे ना रहे...
by Nazar | Oct 2, 2015 | Vivek Tripathi
नाम- विवेक त्रिपाठी पिता का नाम- डॉ0 देवेंद्र दत्त त्रिपाठी माता का नाम – श्रीमती सुधा त्रिपाठी जन्मतिथि – 15-08-1994 शैक्षिक योग्यता- बी.एस.सी.(जीव विज्ञान) सम्बद्धता- प्रगतिशील लेखक संघ साहित्य गुरु- कवि आर्य हरीश कोशलपुरी स्थाई पता- ग्राम-मानापुर, पोस्ट-रामनगर, जिला-अम्बेडकर नगर (उ.प्र.)भारत पिनकोड -224181 ई–मेल- vivektripathi341@gmail.com मोबाइल नं0- +919648353231, +917053854664...
by Nazar | Aug 15, 2015 | Vivek Tripathi
– ग़ज़ल – आदमी बेकार होता जा रहा राह का अख़बार होता जा रहा नफ़रतें लायीं हैं परदेसी हवा मतलबी संसार होता जा रहा जल रहा इंसान अब इंसान से जुल्म का अंगार होता जा रहा झूठ पसरा है ज़हा में इस तरह सच से ही इनकार होता जा रहा कामनायें बढ रही है जीस्त में फ़िक्र पर अधिकार होता जा रहा देखता तक्सीम होते देश को दूर अब घर बार होता जा रहा...
by Nazar | Aug 15, 2015 | Vivek Tripathi
ग़ज़ल जिसे भेंट श्रद्धा सुमन कर रहा था वही देश पूरा हवन कर रहा था मैं जिसके लिये ला रहा था उजाला वही घोर तम का सृजन कर रहा था बुलाती जिसे गाँव की मुशिकलें थीं वो दिल्ली में बैठा भजन कर रहा था सदा डाह रखता ज़माने से जो था ज़माना उसी को नमन कर रहा था बदलने चला था जो बिगड़े चलन को वही सभय़ता आचमन कर रहा था...