——– ग़ज़ल ————
ये भ्रमर गुलसिता में रहे ना रहे
शोख खुश्बू हवा में रहे ना रहे
हर घड़ी को समझ बस यहां आखिरी
कल तु ज़िन्दा जहां मे रहे ना रहे
ज़िन्दगी के मजे़ लूट ले बेसबब
चांदनी फिर निशा में रहे ना रहे
आज ही मांग ले जो तमन्ना है वो
कल को बरक़त दुआ में रहे ना रहे
नेह कर ले जमाने से बनके सुघर
क्या पता मन फ़ेजा में रहे ना रहे
दिल की बातों का इज़हार कर ले सनम
कल ये साहस ज़ुबॉ में रहे ना रहे
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