कुण्डलिया छन्द

खिड़की को देखूँ कभी, कभी घड़ी की ओर, नींद हमें आती नही, कब होगी अब भोर। कब होगी अब भोर, खेलने हमको जाना, मारें चौक्के छक्के, हवा में गेंद उड़ाना। कह ‘अम्बर’ कविराय, पड़ोसन हम पर भड़की जोर जोर चिल्लाये, देखकर टूटी...

मास्टर श्यामलाल

हमारे मास्टर श्यामलाल, करा रहे थे गणित के सवाल। मास्टर जी ने दो सवाल कराये और ऐंठ गए। वापस आ कुर्सी पर बैठ गए। उन्हीं के पास में बैठे थे मास्टर सिंधी, बच्चों को पढ़ाते थे हिंदी। ब्लैक बोर्ड को देखते होल-होले, फिर श्यामलाल से बोले। आपने पाँच मिनट में सब पढ़ा दिया ये देख में चोंकता हूँ, में तो पूरे पीरियड में एक पाठ नही पढ़ा पाता जबकि कुत्तों की तरह भौंकता...

मिसेज डोली

एक दिन मिसेज डोली, अपने पति से बोली, अजी! सुनिए, आज आप बाजार, चले जाइये, और मेरे लिए, एक क्रीम ले आइये, सुना है आजकल, टाइम में थोड़े, क्रीम लगाने से, काले भी हो जाते है गौरे, ये सुनकर पति ने मुँह खोला, और हँसते हुए बोला, अरे ! पगली, तू भी कितनी है भोरी, क्या क्रीम लगाने से, कभी भैंस भी हुई है गोरी...

जीवन वृत्त

      अभिषेक कुमार अम्बर उपनाम –  अम्बर जन्म तिथि- 07 मार्च 2000 जन्मस्थान – मवाना मेरठ उत्तर प्रदेश राष्ट्रियता – भारतीय विद्या – हास्य व्यंग्य , ग़ज़ल , गीत , छंद आदि| अभिषेक कुमार अम्बर हिंदी साहित्य की एक उभरती हुई प्रतिभा हैं। इनका जन्म मेरठ के मवाना क़स्बा में 07 मार्च 2000 को हुआ। आपने प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली से प्राप्त की। आप वर्ष 2014 से निरंतर हिंदी और उर्दू साहित्य की सेवा में समर्पित हैं। आप हास्य व्यंग्य कविता, गीत, ग़ज़ल, छंद आदि विद्या में लिखते हैं। मुख्यतः श्रृंगार रस के कवि हैं तथा देश के सुप्रसिद्ध कवि एवं कवियत्रियों के साथ काव्यपाठ कर चुके हैं जिनमें पद्मभूषण गोपालदास नीरज, पद्मश्री बेकल उत्साही, लक्ष्मी शंकर बाजपाई, ममता किरण, दीक्षित दनकौरी आदि मुख्य हैं। आप साहित्यिक मंचों पर सक्रिय भूमिका में...