– गजल –
जिस जुबां पे न हो जिक्र तेरा सनम
उस जुबां में लहू आदमी का नही
प्यार की तेरे जिस दिल में खुशबू न हो
दिल वो पत्थर है पत्थर महकता नही
बज्मे शादाब से उठके तुम क्या गये
कोई पायल वहॉ आज बजती नही
साथ छूटा तेरा तो गजब हो गया
कोई साया मेरे हक में साया नही
दिल को मेरे न इतना उछाला करो
दिल है प्यारे ये कोई खिलौना नही
चॉद तारे मुझे खुशनुमा क्यूं लगें
सामने जब मेरे तेरा चेहरा नही
लग्जिशों पे न आ अपने घायल के तूं
तेरा घायल है इंसा फरिश्ता नही
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