– ग़ज़ल –

हम तेरी मुहब्बत की खातिर दुनिया को भुलाए बैठे हैं
जो दिल में हमेशा जलती रहे वो शम्मा जलाए बैठे हैं

जो पलकों पे जगमग करते हैं वो क़तरे नहीं हैं अश्कों के
एक वादा शिकन की याद में हम कुछ फूल खिलाए बैठे हैं

अब सब्रो–सुकूँ की तलखी से क्या फायदा है ए हमदरदो
हम प्यार में एक हसीना के सब कुछ तो लुटाए बैठे हैं

लिल्लाह इधर भी जाम बढ़ा पैहम न सही एक बार सही
ऐ साक़ी तेर मैखाने में हम देर से आये बैठे हैं

जब प्यार की बाते होती हैं हो जाते हो तुम क्यों चुप चुप से
है बात कमाल ऐसी ही कोई जो आप छुपाए बैठे हैं

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