– ग़ज़ल –
तुम गरीबों को अपना बनाते चलो
प्यार के फूल हरसू खिलाते चलो
राह पर खार है तुम न कुछ गम करो
कारवॉ अपना आगे बढाते चलो
चाहते हो भलाई कुछ अपनी अगर
हॉ कदम से कदम तुम मिलाते चलो
साफगोई से हरगिज न मुंह मोड़ना
हक पसन्दी का नारा लगाते चलो
वक्त के उन अंधेरों में अय दोस्तों
तुम चरागे मुहब्बत जलाते चलो
कर दिया वक्त ने दिल को घायल मगर
हौसला और हिम्मत बंधाते चलो
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