– गजल

जिस जुबां पे न हो जिक्र तेरा सनम
उस जुबां में लहू आदमी का नही
प्यार की तेरे जिस दिल में खुशबू न हो
दिल वो पत्थर है पत्थर महकता नही
बज्मे शादाब से उठके तुम क्या गये
बज्मे शादाब में खामुशी हो गयी
कोई पायल वहॉ आज बजती नही
कोई कंगन वहॉ अब खनकता नही
गेसुओं वाले जब तक तेरा साथ था
मेरे एहसास में धूप भी छॉव थी
साथ छूटा तेरा तो गजब हो गया
कोई साया मेरे हक में साया नही
फूल मुरझा गया तो खिलेगा कहॉ
और दिल टूटा तो फिर मिलेगा कहॉ
दिल को मेरे न इतना उछाला करो
दिल है प्यारे ये कोई खिलौना नही
बात गुलशन के फूलों से मैं क्या; करूं
बात तुझसे जो होती तो कुछ बात थी
चॉद तारे मुझे खुशनुमा क्यूं लगें
सामने जब मेरे तेरा चेहरा  नही
मैने जाना तुझे मैने माना तुझे
तू मुझे जान ले तू मुझे मान ले
लग्जिशों पे न आ अपने घायल के तूं
तेरा घायल है इंसा फरिश्ता  नही

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