हाये मैं क्या करुँ ़़़़़़

इशारों इशारों की बाते मुसीबत
वो बातों ही बातों में रातें मुसीबत
कहाँ जा के ग़म को हंसाएं बता दे
मुहब्बत में हर रोज़ घातें मुसीबत

अपने खास अन्दाज़ में किसी और का ये शेर पढ़ते हुए कछार के एक नाकाम शायर मिसरा कछारी धन्नों की गली से होकर गुजर रहे थे। बहुत ही भारी भरकम और दर्द भरी आवाज़ थी। ऐसा लग रहा था कि धन्नों की गली से कोई तूफान गुज़र रहा हो। थोड़ी ही देर के बाद एक और आवाज़ सुनाई दी, वो आवाज़ थी एक धक धक शायर तोतले दीवान की। किसी ज़माने में वह रुस्तम भाई के शागिर्द हुआ करते थे। वह रुक रुक कर ये शेर पढ़े जा रहे थे-

मुहब्बत की धड़कन पे गाना किसी का
ज़माना हुआ दिल दिवाना किसी का
न आहें भरो अब न शिकवे करो तुम
ये सुन लो अभी ख़त पुराना किसी का

ऐसा ही शेर किसी ज़माने में मुहब्बत के सताये हुए एक शातिर दिमाग़ हरामखोर शायर हमीद दिलावरी भी पढ़ा करते थे। हरामखोर इसलिये कि वह जिस किसी से कुछ लेते, उसे जल्दी वापस नहीं करते। तकाज़ा कराते। किसी से ग़ज़ल लिखवाते तो उसके बदले कुछ रकम देने का वादा करके नहीं देते। उधार खाना तो उनकी रोज़ की आदत बन गई थी। उनकी इन्हीं आदतों ने उन्हें हरामखोर बना दिया था। वो फरमाते हैं कि-

सभी दिल के दुश्मन हैं ऐ ज़िन्दगी सुन
किसी से गिला अब न कर आशिकी सुन
जो लिक्खा है किसमत में होता रहेगा
कभी कम न होगी मेरी बन्दगी सुन

अपनी बेगम से हमेशा परीशान रहने वाले एक मनहूस और कामचोर शायर मुहब्बत के सदके में एक से बढ़कर एक शेर सुनाया करते थे। एक जगह वो फरमाते हैं-

सता ले ग़मे दिल तू अब जितना चाहे
वफ़ा की क़सम दे के वो आना चाहे
जियेंगे मरेंगे इसी वास्ते सुन
मुहब्बत से मेरी वो क्यों जलना चाहे

फटेहाल शायर हमदम घन्टाघरी के शागिर्द चिलमन जटेपुरी मुम्बई में रहकर बहुत कम पैसे पर अपने गीत दूसरों के नाम करते करते थक गये तो वह अपने वतन वापस लौट आये जहाँ से कभी पूरी दुनिया में धूम मचाने का सपना लेकर मुम्बई फिल्मी दुनिया में गये थे। अब वह किसी से सामना नहीं कर पाते थे। हाँ जब कोई अजनबी या नौजवान मिल जाता तो उसे रोक कर अपने दिल की बात जरूर सुनाते। वो कहते हैं-

बना दिया है ज़माने ने मुहब्बत को गुलाम
कहीं पे जुल्म कहीं आज शराफत को गुलाम
सुना सुना के ये कहते हैं बड़े काम के हम
मगर ये लोग बनाते हैं इनायत को गुलाम

हमेशा मस्त रहने वाले एक दिलजले और मुहब्बत में बरबाद शायर यूसुफ घन्टाघरी जब कभी मुशायरों से फुर्सत पाते तो मुहब्बत की रहगुजर लिखने बैठ जाते। कब शाम हुई कब रात ढली इसका भी ज़िक्र मुहब्बत के साँचे में ढाल कर लिखते और तरन्नुम में अपना कोई शेर तनहाई के नाम भी करते। वो कहते हैं-

हसीन जाने मन छुपा है दिल में क्या
ज़रा मुझे बता हुआ है दिल में क्या
ये रुत जवाँ जवाँ सी है जवान हम
वफ़ा के गीत साथ गा है दिल में क्या

मुहब्बत में लुटे पिटे अंग्रेज़ों की गुलामी के दौर के एक मनहूस और यतीम शायर सलाम घन्टाघरी फरमाते हैं-

पुरानी याद के साये में दिलबर छम छमा छम छम
लिया करता हूँ तेरा नाम जी भर छम छमा छम छम
बना कर खुद को दीवाना बयाँ भी कर नहीं सकता
नहीं है होश कुछ बाक़ी मोयस्सर छम छमा छम छम

दोस्तों ऐसे भी बहुत से शायर हुए हैं जिनके तखल्लुस एक जैसे होते थे। ऐसा इसलिये कि जो शायर अपनी शायरी के दम पर बहुत मशहूर होता था तो उसे देखकर दूसरा नाकाम और बदनसीब शायर हूबहू वैसा ही अपने लिये तखल्लुस बना लेता था। जैसे- असद बदामी, असद दवामी, सन्दल दीवाना, सन्दल बेगाना वगैरह वगैरह। इससे दूसरे शायरों की गज़लें चोरी करना बहुत आसान होता था। ऐसे शायर को अगर किसी मुशायरे में पढ़ने की दावत मिल जाती तो वह उस जगह पर एक दिन पहले ही पहुँच जाता‚ खूब-खूब डींगे मारता और मुशायरे की रात वह दूसरे शायर की ग़ज़ल पढ़ता।

दोस्तो अब मैं आपकी मुलाक़ात एक ऐसे शायर से कराने जा रहा हूँ जिन्हें अपने ऊपर बड़ा घमंड था। उन्हें किन्हीं दस शायरों की ग़ज़लों में से अपने लिये एक ग़ज़ल बनाने का हुनर मालूम था। दोस्तों अगर मैं उस शायर का यहाँ नाम लिख दूँ तो कई हफ्ते तक एक मिसरा पर दूसरा मिसरा नहीं लिख पाऊँगा। इसलिये नाम न लिखूँ तो अच्छा रहेगा। सीधे उन्हें इशारे से माइक पर बुला लेते हैं, वह खुद ही अपना नाम आप लोगों को बता देंगे। माइक पर सुहेल सहजनवी एक ग़ज़ल पेश करते हैं-

फटेहाल शायर की मेहमान होती
कहानी मुहब्बत की आसान होती

पतंगें वफाओं की ऐसी बनाते
धड़कते दिलों की जो तूफान होती

निकम्मों की यारी से पंगा न लेते
निगोड़ी पड़ोसन पहलवान होती

सदा मस्त रहते बहाने बनाकर
शराफत मगर थोड़ी हलकान होती

ग़ज़ल में दिखाते मुहब्बत के तेवर
ज़माने की उलझन दिलोजान होती

सभी अपने दम पर पकौड़ेे बनाते
असरदार लोगों से पहचान होती

किसी दिन निकलते इस अन्धे कुएँ से
मुसीबत बेचारी गिरेबान होती

दोस्तों‚ फिल्म के अदब से गीतों की बात न की जाये तो बहुत बड़ी नाइन्साफी होगी। फिल्म के गीत लिखने में एक से बढ़ कर एक शायरों ने अपना हुनर दिखाया है। यही नहीं गीत के साथ साथ उसका म्युजिक भी बहुत शान्दार होता था। धुन पहले बना ली जाती थी और गीत बाद में लिखा जाता था। दोस्तों ऐसा ही एक गीत फिल्म वक़्त का है जिसे मशहूर गायिका आशा भोंसले ने अपनी आवाज़ दिया है और स्क्रीन पर साधना इसे गाती हुई दिखाई देती हैं, आप भी सुनें-

कौन आया कि निगाहों में चमक जाग उठी
दिल के सोये हुए तारों में खनक जाग उठी
कौन आया………….