गीत

भारत की ऐ सुघर बेटियों हमको तुम पर गर्व है
एक तुम्हारे होने से ही घर दीवाली पर्व है
भारत की ऐ सुघर बेटियों —–

तुम्ही कल्पना तुम्ही अरुणिमा, तुम्ही शैव्या तुम्ही लक्षमा,
तुम्ही बुलन्दी छूने वाली, प्यार बीज का बोने वाली,
हर सपने साकार करे तू कभी नहीं इनकार करे तू
लाखों पुत्रों पर तू भारी एक अकेली खर्व है
भारत की ऐ सुघर बेटियों —–

राजनीति में ऊँचा परचम, जैसे हो तारों में अनुपम
झॉसी की रानी बन बन कर, आती रही धरा पर तन कर
सीता अनसुइया की बेटी, भारत के भावों में लेटी
सूखा को सावन कर डाले तुमसे ही तो सर्व है
भारत की ऐ सुघर बेटियों —–

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