– गीत –
जो ठोकर में बढ़ा करते वही इतिहास गढ़ते हैं
जो सूली पर चढ़ा करते वही इतिहास गढ़ते हैं
जो ठोकर में बढ़ा करते —-
जो तप कर आग में कुन्दन,
जो घिस कर बाद में चन्दन,
जो आनों पर अड़ा करते वही इतिहास गढ़ते हैं
जो ठोकर में बढ़ा करते —-
लीक से हट के चलते,
शिवा से डट के चलते,
जो निर्बल को खड़ा करते वही इतिहास गढ़ते हैं
जो ठोकर में बढ़ा करते —-
जो दलितों पीड़ितों के हित,
करें आलस्य न किंचित,
मुकुट माथे मढ़ा करते वही इतिहास गढ़ते हैं
जो ठोकर में बढ़ा करते —-
जो सबकी मुक्ति में ही सुख,
उठाते रहते हैं नित दुख,
जो मंसूबे गढ़ा करते वही इतिहास गढ़ते हैं
जो ठोकर में बढ़ा करते —-
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