ग़ज़ल

दुश्मन को मेहमान बनाया
पत्थर को भगवान बनाया

मेरे दिल का हाल न पूछो
सारिक को सुल्तान बनाया

खुद को रोटी की चाहत में
साधू से शैतान बनाया

दौरे सियासत का क्या कहना
कुफ्र को ही फरमान बनाया

इस दुश्वारी के आलम में
क्यों मुझको इन्सान बनाया

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