ग़ज़ल

अगर चाहते हो तबाही से बचना
तो सरकार की सुर्ख स्याही से बचना

कहीं डाकुओं से अगर बच गये भी
है मुश्किल बहुत एक सिपाही से बचना

यहाँ न्याय बहरा है कानून अन्धा
हरिश्चन्द की हर गवाही से बचना

मुहब्बत की राहों में धोखे बहुत हैं
सदा एक अन्जान राही से बचना

चढ़ा कर तुम्हें खींच लेंगे किसी दिन
ये वो दोस्त हैं वाह–वाही से बचना

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