गीत

मरेंगे आन पर सदा स्वदेश के लिये
सौ बार जन्म लेंगे अपने देश के लिये
सौ बार जन्म लेंगे —–

जिस देश में बहती है गंगा–यमुना की धारा
जिस देश में लहराता है सागर का किनारा
करते नमन हिमालयी परिवेश के लिये
सौ बार जन्म लेंगे —–

पैदा थे जहाँ राम–कृष्ण, गौतम और गाँधी
ऊधम, भगत, शेखर चलाये क्रान्ति की आँधी
हम भी मिटेंगे जननी के क्लेश के लिये
सौ बार जन्म लेंगे —–

हिन्दू मुसलमाँ सिक्ख औ ईसाई है यहाँ
हर धर्म के अनुयायी भाई–भाई हैं यहाँ
कटिबद्ध हैं हम ऐसे ही उपदेश के लिय
सौ बार जन्म लेंगे —–

हम हैं अनेक फिर भी सदा नेक रहेंगे
हम एक थे हम एक हैं हम एक रहेंगे
बलिदान बालेदीन का अवशेष के लिये
सौ बार जन्म लेंगे —–

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