जीतल महिला प्रधान

सुनिल्या ये पप्पू के बाबू भल घूमत रह्या फुटानी में
अब हम घूमब तब पता लगी जीतल बाटी परधानी में
अब हम घूमब तब पता लगी जीतल बाटी —-

हम पंचइती में जाबे जब तब लड़िकन के बहकाया तू
पंचइती से जब घर अइबै तब पानी हमें पिलाया तू
कंचित अबेर होइ जाय हमें तब चउका चूल्ह जगाया तू
हम आइ जाब रोटी बेलब चट रोटी बैठि सेंकाया तू
हम चाहे आइब जाब जहाँ तू मत घूम्या निगरानी में
अब हम घूमब तब पता लगी जीतल बाटी —-

मीटिंग में कोर्ट कचहरी में साइकिल से हमें पठाया तू
हम आगे आगे चलत रहब बस्ता लै पाछे धाया तू
हम भाग लेब जब मीटिंग में तब चाय समोसा खाया तू
मीटिंग समाप्त होइ गइले पर फिर घर हमकै ले आया तू
अब राजनीति हमहूँ करबै राखल बा काव किसानी में
अब हम घूमब तब पता लगी जीतल बाटी —-

शौचालय गोबर गैस और नाली पुलिया बनवइबै हम
सुन्दरीकरन में गाये कै बड़का पोखरा झरवइबै हम
गड़ही गड़हा बा जहाँ तहाँ समथर ओके करवइबै हम
हर गली कै कचरा दूर करब ईंट सब पर बिछवइबै हम
सब झूरे घर आई जाई केहू पाँव धरी न पानी में
अब हम घूमब तब पता लगी जीतल बाटी —-

कहि लेखपाल से गायें कै सगरो चकरोड पटवइबै हम
सूअर मुर्गी मछली पालन जे चाही उसे देवइबै हम
बंजर कै होई भूमि जहाँ पट्टा आके कै नइबै हम
गाँयें कै झगड़ा छोट मोट–सब घर ही पर निपटइबै हम
समझाइ के राखब सबही के जाये न देब दिवानी में
अब हम घूमब तब पता लगी जीतल बाटी —-

महिला का हमें समझला तू सब कुछ कइके दिखलइबै हम
इन्द्रा आवास सरकारी धन सब ठीक–ठीक बँटवइबै हम
यहि पाँच साल के अरसा में गउवाँ के स्वर्ग बनइबै हम
अपने महिला आरक्षण के सचमुच करि सफल देखइबै हम
हम ‘विकल‘ बहुत झाँसा सहली अब नाहीं सहब नदानी में
अब हम घूमब तब पता लगी जीतल बाटी —-

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