– व्यंग कविता –
पुलिस चमड़े का सिक्का चलाय रही है
और फर्जी इन्काउन्टर देखाय रही है
बेगुनाहों को खूब सताय रही है
तथा गुन्डों से दामन बचाय रही है
शायरी जुगनू की आँसू बहाय रही है
शायरी जुगनू की —–
नौकर शाही रिश्वत में नहाय रही है
इमदाद की वह सारी रकम खाय रही है
काग़ज़ी घोड़ा खुश्की में दौड़ाय रही है
और जनता को अंगूठा दिखाय रही है
शायरी जुगनू की —–
झिल्ली सुरा की शोर मचाय रही है
मस्ती मांझी की नइया डुबाय रही है
गुन्डई गंगू की रंग जमाय रही है
इन्सानियत बेचारी लुकाय रही है
शायरी जुगनू की —–
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