( चौखट हूँ मैं )
मैं, चौखट हूँ,
सजोये रखी है मैंने
कई वर्षों की यादें
न भूली हैं अबतक
वो बीती हुई बातें
पिछली तीन पीढि़यों से
इस घर की देखभाल करने में लगा हूँ
हर मित्र और शत्रु से
मेरे अपनों की ढाल बनने में लगा हूँ
याद आता है मुझे
मेरे अस्तित्व में होने का वो पल
जैसे लगता है अभी तो बीता है वो कल
शुभ मुहूर्त में पवित्र मन्त्रों के मध्य
घर के प्रथम द्वार पर लोगों ने मुझे बैठाया था
उस दिन तो गोतिनों ने भी
क्या खूब गीत गाया था
तबसे,
इस घर की सीमा से बंधा हूँ
पर्दे में पैबंद सीने में लगा हूँ
पर जबसे बुजुर्गों की आँखे नम होने लगी है
मेरी भी इज्जत घर में कम होने लगी है।
मुझे अब तो घर में कोई पूजता नहीं है
जैसे बुजुर्गों को कोई पूछता नहीं है
फिर भी,
मेरे अन्दर विश्वास है, सुरक्षा है, प्यार है
वैसे तो कहने को अपना संसार है
सच ये है,
मेरे बाहर की दुनियाँ तो बस एक व्यापार है
मैं चौखट हूँ
हाँ मैं चौखट हूँ।