असली चेहरा-नक़ली चेहरा देख लिया
कफ़न बँधा मैंने इक सेहरा देख लिया,
असली चेहरा-नक़ली चेहरा देख लिया।
घर की दीवारों को जबसे कान हुए,
इन्सानों को गूँगा-बहरा देख लिया।
मिट्टी के कारिन्दे सोने की ख़न्जर,
आँखों के पहरों पर पहरा देख लिया।
घूँघट में ज्वालामुखियाँ, लहरों में लपटें,
दिल को सागर से भी गहरा देख लिया।
तुम भी मेरे साथ चढ़ोगे शूली पर,
मैंने भी क्या ख़्वाब सुनहरा देख लिया।
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