मुस्काना जब भी चाहे, रूलाये गये है हम

हँस-हँस के याद भुलाये गये हैं हम,
कैसे बतायें कितना सताये गये हैं हम।

क़ुदरत का करिश्मा है कि हम सामने खड़े,
वरना हज़ार बार मिटाए गये हैं हम।

अपनों ने मुझे बेंचा है, गैरों ने खरीदा,
हर रोज़ ख़जाने से चुराये गये हैं हम।

मत जि़न्दगी के जश्न की तस्वीर माँगिये,
मुस्काना जब भी चाहे, रूलाये गये हैं हम।

ऐसे चिराग़ जिसमें की बाती न तेल है,
तूफान में बेख़ौफ जलाये गये हैं हम।

श्मशान पर जब आँख खुली तो समझ गये,
करने के लिए क़त्ल जिलाये गये हैं हम।

––-