चुम्बन और झापड़
गली के मोड़ पर एक आलीशान दुकान
तीन ग्राहक विद्यमान– वृद्धा, तरुणी, जवान
सामानों के बी उलझा हुआ दूकानदार
चल रहा लेन–देन बात व्यवहार
अचानक बिजली गुल हुई
ज्योति उड़ी, धुआँधार निविड़ अन्धकार
स्याही में सभी डूबने लगे
अन्धेरे में जवान को सूझा मजाक एक प्यारा
उसने अपने हाथ का चुम्बन लिया
दूकानदार को एक झापड़ मारा
चुम्बन और झापड़ गूँज उठा
यों लाभ और घाटा लड़खड़ा उठा सन्नाटा
बुढ़िया सोचने लगी
चरित्रवती युवती ने उचित व्यवहार किया
चुम्बन का झापड़ से जवाब दिया
तरुणी सोचने लगी
हाय रे मूर्ख नादान, अजनबी, अन्जाना
मुझे छोड़ कर बुढ़िया पर मर मिटा
बेचारा अनायास पिटा
और दूकानदार पछताता हुआ
अपना गाल सहलाता हुआ
सोच–सोच कर रहा है गम
चुम्बन किसने लिया हाय पिटे हम
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