– तुम्हारे बिना –
लगता नहीं फागुन में मन
टेस्ट मैच हो गया जीवन
तुम्हारे बिना
बाग और बगीचे में
खुशियों का अपहरण
फिल्डिंग करता वातावरण
धड़क रही खिड़की
किन्तु द्वार शम–दम
घर लगता स्टेडियम
दर्शक दीवानों में कौतुक उभरा
पिच लगता बिस्तरा
बालिंग के नये अन्दाज
सजग बल्लेबाज
भटक रहा गें सा यौवन
तुम्हारे बिना
कोकिल पपीहे सब
सुना रहे कमेन्टरी
बिरहा बना रहा सेन्चुरी
मधुर टीस मार रही छक्के
छूट गये धीरज के छक्के
चौका लगा रही वेदना
मन होता अनमना
पवन बार–बार करे शोर
बढ़ता स्कोर
पहरे पर पुलिस पलाशवन
तुम्हारे बिना
मन हुआ कैच आउट
अभिलाषा रन आउट
मिलन एल०बी०डब्लू० हुआ
इच्छा को फ्लू आ आ
क्लीन बोर्ड हो गया अनुमान
घबड़ाया कप्तान
बच गया फालोआन
फिर भी उदासी
सुना होगा तुमने भी
मेरे ब्रजवासी
रन को टटोल वह सात मधुबन
टेस्ट मैंच हो गया जीवन
तुम्हारे बिना ।
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