– गीत –

तम से घबराकर जीवन को यूँ ही तुम ठुकराओगे,
पीर ख़ुशी की निकट सहेली जब तक जान न जाओगे

आंसू ने जब प्रथम बार
आँखों से विदाई मांगी होगी
क्या मालूम क़ि खुशियाँ होंगी
या गम की परछाईं होगी
आंसू के इस द्वंद्व सा जीवन जब तक सीख़ न जाओगे
तम से घबराकर जीवन को यूँ ही तुम ठुकराओगे

ओस को ये मालूम है उसको
भोर के संग में मिट जाना है
जीवन है अनित्य फिर भी
अपना अस्तित्व दिखा जाना है
एक रात का जीवन जीना जब तक सीख न जाओगे
तम से घबराकर जीवन को यूँ ही तुम ठुकराओगे

समय बहुत बलवान है एक दिन
सब पर घात  लगाता  है
बुरा समय जब आता तो
साया भी न साथ निभाता है
कठिन समय में धीरज धरना जब तक सीख न जाओगे
तम से घबराकर जीवन को यूँ ही तुम ठुकराओगे

मन में मैल न रखना जब कोई
अपना  तुम्हें सताता  है
सूरज का रथ कोई नहीं
चंदा ही रोकने आता है
जब तक सूरज सी विशालता अपने उर ना लाओगे
तम से घबराकर जीवन को यूँ ही तुम ठुकराओगे
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