– रक्षा बन्धन –
उपजै एक कोख सहोदर होई
एक आपन और एक थाती पराई
यह सावन पूनम की तिथि को
नित याद करै भगिनी अरु भाई
जइसे कौशल दस शीश भये
अरु द्रोपदी चीर बढ़ाये कन्हाई
यह प्रीत पुनीत कै साखी है राखी
भाई के लिये बहिनी कै दोहाई
एक ताग बिना अनुराग लिये
घर त्यागि पिया कै रहैं सब धाई
भोखै चलना कोखै ललना
झोखै में लिये चिनिया कै मिठाई
कुछ आस लिये अभिलाष लिये
मइया से चलीं नेगवा कुछ लाईं
देखतै कौशल धंसि जाय धरा
अबके अइसै बहिनी अरु भाई ।
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