– सारी –
बइठे जब मोटर गाड़ी में
तब देखे अचरज नारी का
बस में घुसते ही साहब एक
मार ठोकर एक नारी का
वह गिरी लड़खड़ा कर बस में
लगा शीशा सर में गाड़ी का
खूनों की धारा बह निकली
सारा आँचल भीगा साड़ी का
अधमरी गिरी वह पड़ी रही
अब हाल कहीं का नारी का
सारी जनता है फेंक रही
फौव्वारा उन पर गाड़ी का
साहब सोचे अपने मन में
भगवान विपति भई नारी का
चोटन पर झट से लगा दिये
मरहम निकाल कर सारी का
सारी में भारी करामात
दुख दूर हुआ बेचारी का
वह बोली कोई बात नहीं
इसमें है चूक सवारी का
कौशल सोचै अपने मन में
अब करिहैं चोट बीमारी का
हमहू चलि के केहू साहब से
लै आइब मरहम सारी का।
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