गीत

झुरू झुरू पछुवा कड़ेर पुरवइया में,
बाड़ा नीक लागेला टुटलकी मड़इया में ………. (टेक)

गोल गाल गुलवरी के लगे कोलूहाड़ी
छवरी के ओर पार लउके उखियाड़ी,
होखेला लुकवली सरीसइया में केरइया में ………. (टेक)

लइका ना चिन्हेले दिन दुपहरिया,
भोरही में कुछुकेली कारी कोइलरिया,
होखेली छुववलि तलवा में तलइया में ………. (टेक)

डूबते सूरज मये काम जब ओराला,
लोग बिटुराला त ढोलकी ठोकाला
जुटेले ‘अनारी’ लोग गीत गवनइया में ………. (टेक)

अब ना सहात बा, कोइलिया के बोलिया
बोले बसवरिया पर भोर के पहरिया त लागे जइसे गोलिया ………. (टेक)

सेजिया पर लोटेली काली रे नगीनिया,
रोजा करनिनिए में उचटेली निनिया,
मारेली ताना, मनमाना, जनाना, आ करेली ठिठोलिया ………. (टेक)

सनन्-सनन् सन बहे पुरवइया,
दाहा अइसन देह डोले जइसे डोले नइया,
अखेड़ेला बाड़ा जब खाड़ा होके देखी
कवनो गवने के कनिया ………. (टेक)

जुल्मी जवानी के जोम ना अड़ाता,
जीही की मरि जाई कुछु ना बुझाता,
तुत ‘अनारी’ बेमारी बढ़वल बीतल
फागुनो के होलिया ………. (टेक)

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