– गीत –
सीता, सावित्री हमही बनबी मीराबाई
जनि मुववाव माई खाके दवाई ………. (टेक)
करबू कुकरम लागी भारी हतियारी,
देबे लगिहे गारी पाता लागते ‘अनारी’
जहर होई जिनगी चलबू मुंह चोरवाई ………. (टेक)
छोडि़ देबू जियत त बाजी कहियो बाजा,
आई बरिआति संगे रही हे दुलहा राजा,
गारी गवाई दुअरा बाजी शहनाई ………. (टेक)
पीतर नेवतबू तु मानर पूजि के
लावा मेरइहे भइया देबू जवन भुजि के,
दीहे कनिया दान पापा जाॅघ पर बइठाई ………. (टेक)
बेटी हम बन तानी, हमरो अफसोस बा,
लेता दहेज त समाज के न दोष बा,
लिखनी विधाता के केहू ना मेटाई ………. (टेक)
आपन वाली करबू ना सुनबु घिघिआइल,
त दर-दर के ठोकर खइबू फिरबू बिलाइल,
हो जइबू कोढ़ी चाहे चरक फूटी जाई ………. (टेक)
रतिया विरतिया में झंख तारी गोरिया,
गइले दुकहिए पिया, पूरब की ओरिया ………. (टेक)
चिठी पाती दिहले नाही, भेजले उदेशवा
नाही टेलीफोनवो से दिहले खबरिया ………. (टेक)
कइले कि आइबी हाले लेके धनि गहना,
कुरती आ साया संगे हरियर चुनरिया ………. (टेक)
ताक तानी राते दिने छत पर बइठी के,
कहिया ले अइहे पिया, तेजि के शहरिया ………. (टेक)
अब ना अगोरबि बेसी सुनि ल ‘अनारी’
हाले देने नइहर के धरबि डहरिया ………. (टेक)
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