(1) तूफान में कश्ती को संभाला नहीं जाता
मुझ तक किसी दिये का उजाला नहीं जाता
जीने की भला कैसे उम्मीद छोड़ दूँ
नाकामियों को मौत से टाला नहीं जाता

(2) ये नन्हें पाँव हैं मेरे मुझे चलना नहीं आता
बहुत मासूम भोली हूँ मुझे छलना नहीं आता
न जाने लोग कैसे घर किसी का फूँक देते हैं
दिया दहलीज की हूँ आग सा जलना नहीं आता

(3) उम्र भर प्यार के गीत गाते रहो
दर्द में भी सदा मुस्कुराते रहो
मंजिलें चूम लेंगी तुम्हारे क़दम
राह काँटों में अपनी बनाते रहो

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