by Nazar | Aug 8, 2015 | Yaseen Ghayal
– गजल – जिस जुबां पे न हो जिक्र तेरा सनम उस जुबां में लहू आदमी का नही प्यार की तेरे जिस दिल में खुशबू न हो दिल वो पत्थर है पत्थर महकता नही बज्मे शादाब से उठके तुम क्या गये बज्मे शादाब में खामुशी हो गयी कोई पायल वहॉ आज बजती नही कोई कंगन वहॉ अब खनकता नही गेसुओं वाले जब तक तेरा साथ था मेरे एहसास में धूप भी छॉव थी साथ छूटा तेरा तो गजब हो गया कोई साया मेरे हक में साया नही फूल मुरझा गया तो खिलेगा कहॉ और दिल टूटा तो फिर मिलेगा कहॉ दिल को मेरे न इतना उछाला करो दिल है प्यारे ये कोई खिलौना नही बात गुलशन के फूलों से मैं क्या; करूं बात तुझसे जो होती तो कुछ बात थी चॉद तारे मुझे खुशनुमा क्यूं लगें सामने जब मेरे तेरा चेहरा नही मैने जाना तुझे मैने माना तुझे तू मुझे जान ले तू मुझे मान ले लग्जिशों पे न आ अपने घायल के तूं तेरा घायल है इंसा फरिश्ता नही ...
by Nazar | Aug 8, 2015 | Yaseen Ghayal
– ग़ज़ल – आज जिन्दगी अपनी उलझनों मे कटती है रात भर ये तनहाई सॉप बनके डसती है कौन सुनने वाला है गम की दास्तॉ अपनी आजकल जमाने में आप ही कि चलती है कोई तो बता दे ये है कहॉ मेरा हमदम बार बार मिलने की आरजू मचलती है मैं तो उस पे हर लम्हा जॉनिसार करता था फिर वो बेवफा ऐसी रास्ता बदलती है दफ्न करके जब मैयत मेरी जा चुके घायल तब वो कब्र पे मेरी आके हाथ मलती है ...
by Nazar | Aug 8, 2015 | Yaseen Ghayal
– ग़ज़ल – तुम गरीबों को अपना बनाते चलो प्यार के फूल हरसू खिलाते चलो राह पर खार है तुम न कुछ गम करो कारवॉ अपना आगे बढाते चलो चाहते हो भलाई कुछ अपनी अगर हॉ कदम से कदम तुम मिलाते चलो साफगोई से हरगिज न मुंह मोड़ना हक पसन्दी का नारा लगाते चलो वक्त के उन अंधेरों में अय दोस्तों तुम चरागे मुहब्बत जलाते चलो कर दिया वक्त ने दिल को घायल मगर हौसला और हिम्मत बंधाते चलो ...