ग़ज़ल

एक आलमे हैरत है फ़ना है ना बक़ा है
हैरत भी ये है कि क्या जानिये क्या है

सौ बार जला है तो ये सौ बार बना है
हम सोख्ता जानों का नशेमन भी बला है

होंटों पे तबस्सुम है कि एक बर्के–बला है
आँखों का इशारा है कि सैलाबे फ़ना है

सुनता हूँ बड़े ग़ौर से अफ़सानए हस्ती
कुछ ख्वाब है कुछ अस्ल है कुछ फर्जे अदा है

है तेरे तसव्वुर से यहाँ नूर की बारिश
ये जाने–हज़ीं है कि शबिस्ताने हिरा है

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