टका सेर भाजी ह टका सेर खाजा
नगरी अन्हेर हउवे धमधूसर राजा
अइसन ना अवसर पइ ब भरि ल अंजुरी
खा कउवा मामा गदा गइल जोन्हरी
खा कउवा मामा ……….
मासू क मोटरी ह गीध रखवार बा
चामे क बेरहा कूकुर रखवार बा
नाथ नाहींं पगहा खाला खेत गदहा
बकुलन के सउँपल बा ताले क मछरी
खा कउवा मामा ……….
अन्हरा बांटे सिरनी मिलि जुलि खात बा
मुसवा मोटाइल लोढ़ा भइल जात बा
टूटि गइले सिकहर बिलारी के भागी
घिउवे में पाँचो बुड़ल हउवे अंगुरी
खा कउवा मामा ……….
रहरी क टाटी ह गुजराती ताला
सुअरी के ह सेनुर गिरगिटे क माला
तेलवा चमेली क माथे छछुनरी के
गलवा पे पउडर घसति बाटी बनरी
खा कउवा मामा ……….
उपदेसवा देत ह अहिन्सा क चीता
मुड़ि कटवे बाँचे रमायन आ गीता
दे ख कुलबोरनी बनेले पुरुवन्ता
सीता कहाली जनमवे क ओढ़री
खा कउवा मामा ……….
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