– गीत –
कोरे मन पर प्रिये, नेह के पावनी
गीत तुम भी लिखो, गीत हम भी लिखें,
हर इक शब्द में, गुनगुनाती हुई
प्रीत तुम भी लिखो, प्रीत हम भी लिखें
गीत तुम भी लिखो . . . . .
पायलों की छनक, चूड़ियों की खनक,
मन की सोयी उमंगें जगाती रहीं,
रात तारों ने आ कर सताया मुझे,
चांदनी चाँद की भी जलाती रही,
दिल जो माने सही, प्रेम की इक नई
रीत तुम भी लिखो, रीत हम भी लिखें
गीत तुम भी लिखो . . . . .
तुमने जो छू लिया, हो गयी बावरी,
जब अधर पर धरा, बांसुरी हो गयी,
तान चाहत की जब, तुमने छेड़ी प्रिय,
मैं तेरी हाँ तेरी हाँ तेरी हो गयी,
दिल के इकरार को, प्रेम में हार को,
जीत तुम भी लिखो, जीत हम भी लिखें
गीत तुम भी लिखो . . . . .
मैं नदी जो बनूँ , तुम किनारा बनो,
साथ इक दूजे का, हम तजें न कभी,
हर लहर प्रेम की, गीत गाती रहे,
वेदना से भरे, सुर सजें न कभी,
अपनी हर आस को, अपनी हर प्यास को,
मीत तुम भी लिखो, मीत हम भी लिखें
गीत तुम भी लिखो . . . . .
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