– दहेज गीत –

जनि सोचा बिरना हमार बहिनीं कुंआर ना रही।
खूनवां जराके हमें एम0 ए0 ले0 पढ़उलऽ,
सपना हजार अंखिया में तूं सजउलऽ,
आजु ऊ भइल तार-तार बहिनीं कुंआर ना रही।

हमरे करनवां नऽ खेतवा बिकाई,
गहना माई कऽ अब बान्हे ना धराई,
हीरो होण्डा आई नऽ उधार बहिनी कुंआर ना रही।

खाइ के जहर आपन तजबो परनवां,
डोली पहुंचाइ दीहऽ नदिया किनरवां,
मिली जइहें सजनां हमार बहिनीं कुंआर ना रही।

एतना सुनत रोके बोलेला बिरनवां,
धीर धरा बहिनीं लवटि अइहें दिनवां,
असरा पर टीकल सनसार-बहिनीं कुंआर ना रही।

रतिया अन्हरिया ई कहिया ले रहिहें,
कहियो रवनवां दहेजवा क जरिहें,
बालेदीन कहें बार-बार, बहिनीं कुंआर ना रही।